[10 Tips] अच्छा बोलना कैसे सीखे? | समाज में बोलने का तरीका

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अच्छा बोलना कैसे सीखे?

अच्छा बोलना कैसे सीखे: समाज में बोलने का तरीका भी अपने आप में एक कला होती है। जिन लोगों के अंदर मंच पर बोलने की कला होती है, उनकी बात और आवाज को हर कोई सुनने को मानो बेताब हुआ रहता है। लेकिन परेशानी उन लोगों के लिए रहती है जिनके अंदर अच्‍छा बोलने की कला नहीं होती है। वो या तो बोलने से हमेशा बचते रहते हैं। या जब भी उन्‍हें बोलने के लिए कहा जाता है तो कोई ना कोई बहाना बना लेते हैं। क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि यदि वो कुछ भी बोलेंगे तो हंसी का पात्र ही बनेंगे।

यदि आप भी ऐसी ही परेशानी से गुजर रहे हैं तो हमारे इस लेख को आप अंत तक पढिए। अपने इस लेख हम आपको वो तमाम बातें बताएंगे जिनकी मदद से आप अच्‍छा बोल सकते हैं। इसके बाद यदि आप उन तरीकों को अपनाते हैं तो दिन आप भी अच्‍छे वक्‍ता बन सकते हैं। तो चलिए जानते है किला आप अच्छा बोलना कैसे सीखे?

अच्‍छा बोलने का क्‍या मतलब होता है?

समाज में बोलने का तरीका आपके व्यक्तित्व की झलक दिखता है। बहुत से लोगों का मानना होता है कि अच्‍छा बोलना उसे ही कहा जाता है जिसकी वाणी बेहद मधुर और सुरीली होती है। लेकिन वास्‍तव में ऐसा बिल्‍कुल नहीं है। अच्‍छा बोलने मे जितना आपके मुंह से निकली बोली का योगदान होता है, उतना ही आपकी Body Language और आपके ज्ञान का भी योगदान होता है।

इसे इस बात से समझ सकते हैं कि आपकी आवाज कितनी भी मधुर क्‍यों ना हो लेकिन यदि आपको समाज में बोलने का तरीका नहीं पता और आप हर समय बिना मतलब की बातें करते रहते हैं तो आपकी बात को कोई सुनना नहीं पसंद करेगा। जो कि आपने भी कई बार अनुभव किया होगा। “अच्छा बोलना कैसे सीखे” इस लेख का यही उद्देश्य है कि आप भी समाज में बोलने का तरीका सीखकर अपने आप को सही तरीके से प्रस्तुत कर सके।

अच्छा बोलना कैसे सीखे? | समाज में बात करने का तरीका

सोच समझ कर बोलें

किसी भी काम को सोच समझकर करना हमेशा से समझदारी भरी बात बताई गई है। ऐसे में यदि आप भी अच्‍छा बोलना चाहते हैं तो जरूरी है कि आप सोच समझकर बालें। इसके लिए आप पहले तय कर लें कि आप क्‍या बोलना चाहते हैं। वो बात किस समय बोली जानी सबसे ज्‍यादा सही रहेगी। साथ ही यदि आपकी उस बात से किसी की आत्‍मा को ठेस तो नहीं पहुंचेगी। हालांकि, जरूरत होने पर हमें कड़वी बात बोलने से भी परहेज नहीं करना चाहिए। यदि आप इन सब बातों को ध्‍यान में रखकर बोलेंगे तो हमेशा आपकी बात को लोगों के द्वारा सराहा जाएगा।

Research करके बोलें

यदि आप किसी Meeting में जा रहे हैं या किसी ऐसी जगह जा रहे हैं जहां आप किसी विशेष मुद्दे पर बात करने जा रहे हैं। तो ऐसे समय में जरूरत होती हैं आप जाने से पहले उस विषय की पूरी गहराई से छानबीन कर लें। ताकिे जब वहां उस मुद्दे पर आप पूरी बात सुन रहे हों तो बात आपके समझ में आए साथ ही यदि आपाको जब बोलने का मौका दिया जाए तो अपनी बात पूरी गहराई के साथ रखें।

ऐसे समय में समाज में बोलने का तरीका यह है कि यदि आपके पास कोई नयी जानकारी है तो उसे सभी लोगों को बताकर आप सबकी नजरों में भी आ सकते हैं। यदि आप ऐसा दो तीन बार करते हैं तो अगली Meeting में लोग आपसे खुद जानकारी लेंगे।

आप गूगल में चाहें जीतनी बार “अच्छा बोलना कैसे सीखे” सर्च करे और पढ़े इससे कोई फायदा नहीं होगा यदि आप अपनी किसी बात को कहते समय उस से सम्बंधित किसी प्रकार की कोई ठोस जानकारी नहीं देते।

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समाज में बोलने का तरीका

अपने स्‍वभाव में विनम्रता लाएं

कहते हैं कि ‘फलदार वृक्ष हमेशा झुक जाते हैं’। इसका मतलब ये है कि यदि आपने किसी को कोई बात गलत‍ कह दी है तो उसे सहज ही स्‍वीकार कर लें। साथ ही यदि आपको जरूरत लगे तो उससे माफी भी मांग लें। इससे उस इंसान के अदंर तो आपके प्रति सम्‍मान बढ़ेगा ही। साथ ही आपको भी अपने आप से किसी प्रकार की शिकायत नहीं रहेगी। इस आदत को भी बनाने के लिए आपको लंबे समय तक प्रयास करना होगा।

बातों के दोहराव से बचें

बहुत से लोग एक ही बात को बार बार बताते रहते हैं। जिससे सुनने वाले तो परेशान होते ही हैं। साथ ही इससे उन लोगों के दिमाग में आपकी छवि भी खराब होती है। इसलिए इस बात का हमेशा ध्‍यान रखें कि आप एक ही बात को बिना जरूरत के बार बार ना कहें। इसका प्रयोग खाली उस दोरान करें जब आपको लगता हो कि आपकी बात कोई सुन नहीं पाया और ये सभी के लिए जरूरी बात है।

ज्‍यादा तेज आवाज में ना बात करें

यदि आप हर जगह अपने घर की तरह ही तेज आवाज में बात करना पसंद करते हैं, तो आपकी ये आदत बेहद खराब है। बोलते समय हमें अपनी आवाज को इतना तेज रखना चाहिए कि सामने वाले तक हमारी आवाज केवल पहुंच जाएं। यदि आपकी आवाज कम होगी तो भी गलत है और ज्‍यादा तेज है तो दूसरे लोगों को भी गलत लगेगा। ये आदत आप एक दिन में तो नहीं बना सकते हैं। लेकिन इसके लिए यदि आप रोजाना प्रयाय करेंगे तो आप एक दिन इसमें जरूर सफल हो जाएंगे। जिसके बाद आपको अपनी अपनी आवाज पर नियंत्रण रखने में आसानी रहेगी।

बोलते समय हड़बड़ी ना दिखाएं

यदि आप इस तरह बात करते हों जैसे कि हमेशा किसी जल्‍दबाजी में हो तो ये भी आपके लिए नुकसान देह है। इसके लिए जरूरत है कि आप अपने शांत स्‍वभाव से लोगों से बात करें। साथ ही कोशिश करें कि यदि आप किसी जल्‍दबाजी में हैं तो भी सामने वाले को इस बात का पता ना लगने पाए कि आप किसी जल्‍दबाजी में हैं। इससे सामने वाले को आपकी बात भी समझ आ जाएगी और आप भी अपनी पूरी बात आराम से कह सकेंगे। इस आदत को भी अपने अंदर बनाने के लिए लंबे समय तक प्रयास करना होगा।

जातिगत या धार्मिक टिप्‍पणी करने से हमेशा बचें

हर किसी की कोई ना कोई जातिगत और धार्मिक विचारधारा होती है। लेकिन जरूरत इस बात की है किे आप इसे किस तरह जाहिर करते हैं। इसलिए जब भी आप बोलें तो कभी भी अपनी बात के बीच मे किसी जातिगत या धार्मिक बात ना कहें। इससे ना सिर्फ आपकी छवि खराब होगी, बाल्कि आपको लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस तरह की बात जब भी करने की जरूरत पड़े तो बोलने से पहले सोच लें और संयमित होकर बालें।

समाज में बात करने का तरीका

दूसरे बोलने वालों से सीखें

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके बोलने का लोग इंतजार करते हैं। लोग उन्‍हें सुनने के लिए बहुत दूर दूर से आते हैं। आपको चाहिए कि आप टीवी या रेडियो पर ऐसे लोगों की बात जरूर सुनें। उनक बोलने के तरीके से सीखें कि वो किस तरह बोलते हैं कि लोग उन्‍हें सुनने के लिए बेहताब रहते हैं। हालांकि, कभी भी आप किसी की नकल ना करें। इससे जब लोगों को पता चलेगा तो आपकी आलोचना करेंगे। आप सिर्फ उनसे सीख कर उसे अपने ढंग से अपनाएं।

आसान तरीके से बोलें

जब आप किसी कठिन बात को उसी भाषा में बताने लगते हैं तो ना तो सामने वाले को समझ आता है ना ही आप उसे बेहत‍र ढंग से समझा पाते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप जब भी किसी बात को बालें तो सबसे पहले स्‍वंय समझ लें कि पूरी बात आखिर क्या है। इसके बाद उसे अपनी भाषा में समझाएं। ताकि बात को सामने वाले को आसानी से समझाया जा सके और उसे समझ भी आ सके।

अपनी मातृ भाषा में बोलें

बहुत से लोग दूसरों पर अपना रंग जमाने के लिए अंग्रेजी भाषा में बात करने लगते हैं। भले ही उन्‍हें अंग्रेजी कम आती हो। यदि आप भी ऐसा करते हैं तो इससे बचें। क्‍योंकि बोलने में भाषा का सबसे अहम योगदान होता है। लेकिन जब आप किसी ऐसी भाषा में बात करते हैं तो जिसका आप खुद ज्ञान नहीं रखते तो आप अपनी बात कभी बेहतर ढंग से नहीं रख पाते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप जिस भाषा में पले बढ़ें हों उसी भाषा में अपनी बात रखें। एक दिन लोग आपकी इसी भाषा के दीवाने हो जाएंगे।

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बोलने से पहले सुनने का धैर्य रखें

कहते हैं कि एक अच्‍छा वक्‍ता बोलने से पहले अच्‍छा श्रोता होता है। इसलिए आप भी इस मंत्र को गांठ बांध लें कि अगली बार जब भी कोई बोल रहा होगा तो उसे पूरे ध्‍यान से सुनेंगे। भले ही वह खराब ही क्‍यों ना बोल रहा हो। जब तक आप सुनना नहीं सीखेंगे तब तक आप कभी नहीं समझ पाएंगे कि बोलने के दौरान आपको किन गलतियों से बचना है। आप अपने अंदर और ज्‍यादा सुधार कैसे ला सकते हैं।

कम शब्‍दों में अपनी बात कहें

जो लोग बड़ी से बड़ी बातों को भी कम शब्‍दों में कह देते हैं। उन्‍हें लोग हमेशा सुनना पसंद करते हैं। इसलिए आप जब भी किसी से बात करें तो हमेशा कोशिश करें कि आप अपनी बात बहुत जल्‍दी खत्‍म कर दें। जिसके बाद लोग कहने को मजबूर हो जाएं कि आपने कम शब्‍दों में जैसे ‘गागर में सागर भर दिया’ इसके लिए आपको नियमित अभ्‍यास करना होगा। साथ ही अपनी ज्‍यादा बोलने की आदत का सयंमित करके रखना होगा।

Conclusion

कहा जाता है है कि “first impression is the last impression” इसलिए हमेशा अपनी बात को किसी रोचक तरीके से शुरू करें ताकि श्रोता का मन आपकी बात में लगे और वे आपकी बात को सुनने के लिए उत्सुक हों। यदि ऐसा नहीं है तो आपके बात करते समय यदि कुछ लोग आपस में बातचीत करने लगे तो आपको भी अपनी बात कहने में मजा नहीं आयेगा।

इसका रिजल्ट यह होगा कि सब “गुड़ गोबर” हो जायेगा, और आप जल्दी-जल्दी अपनी बात को पूरा कहे बिना ही बैठ जायेंगे। आशा करता हूँ कि यह आर्टिकल “अच्छा बोलना कैसे सीखे” आपके लिए जरुर लाभकारी होगा, इसी कामना के साथ जय हिन्द जय भारत।

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नमस्कार दोस्तों, मैं रवि "आल इन हिन्दी" का Founder हूँ. मैं एक Economics Graduate हूँ। कहते है ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता कुछ इसी सोच के साथ मै अपना सारा ज्ञान "आल इन हिन्दी" द्वारा आपके साथ बाँट रहा हूँ। और कोशिश कर रहा हूँ कि आपको भी इससे सही और सटीक ज्ञान प्राप्त हो सकें।

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