बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका, 10 तरीके

बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका

बच्‍चों को पढ़ाना आज के समय में किसी चुनौती से कम नहीं है। क्‍योंकि हर माता पिता की ये शिकायत रहती है कि उसका बच्‍चा पढ़ता बिल्‍कुल नहीं है। यदि आपकी भी ऐसी कोई शिकायत है तो आज हम आपको बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका बताने वाले है, जिसकी मदद से आप अपने छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाएं? ये आसानी से समझ पाएंगे.

यदि अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्‍होंने उसे शहर के सबसे अच्‍छे स्‍कूल में दाखिला भी दिलवाया है। उनकी ट्यूशन भी लगवाई होती है। लेकिन फिर भी उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता है। इसके लिए वो कई बार कुछ ऐसे कदम भी उठा लेते हैं। जो‍ कि बच्‍चे के लिए आगे चलकर घातक सिद्ध होते हैं।

यदि आप भी किसी ऐसी ही परेशानी से गुजर रहे हैं तो हमारे इस लेख को आप अंत तक पढि़ए। अपने इस लेख में हम आपको बताएंगे कि आप किस तरह से अपने बच्‍चे को पढ़ाई की तरफ आसानी से ला सकते हैं। साथ ही तमाम वो संभावित कारण बतांएगे जो कि अक्‍सर बच्‍चे को पढ़ाई से दूर कर देते हैं। तो चलिए जानते है बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका क्या है।

बच्‍चों का पढ़ाई से दूर होने के प्रमुख कारण

बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका जानने से पहले यह बहुत ही जरुरी है है की हम यह जान ले कि बच्‍चों का पढ़ाई से दूर होने के प्रमुख कारण क्या है? क्योकि बीमारी का पता होने पर ही उसका सही से इलाज हो सकता है।

  • बच्‍चों को आज के समय में सोशल मीडिया अपनी दिशा से भटकाने का काम कर रहा है। इसलिए यदि आपके बच्‍चे दिनभर सोशल मीडिया पर लगे रहते हैं वो अक्‍सर पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं।
  • ‘जैसी संगत वैसी रंगत’ इसलिए यदि आपका बच्‍चा गलत संगत में उठता बैठता है तो उसका पढ़ाई में मन कभी नहीं लगेगा। क्‍योंकि बुरी संगत वाले लोग कभी पढ़ने लिखने की बात नहीं करते।
  • यदि आपका बच्‍चा किसी ऐसी जगह बैठकर पढ़ता है जहां ना सही लाइट की व्‍यवस्‍था है और ना ही सही तापमान रहता है तो उसका पढ़ाई में मन नहीं लगता है। परे समय या तो पसीना साफ करता रहेगा या ठंड से ठिठुरता रहेगा।
  • यदि आपका बच्‍चा पढ़ाई के साथ कहीं काम भी करता है तो अक्‍सर उसके शरीर में थकान हो जाती होगी। इस परिस्‍थिति में भी बच्‍चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है।
  • यदि आप लोग हमेशा घर में लड़ाई झगड़ा करते रहते हैं तो सामान्‍य सी बात है कि आपका बच्‍चा इससे परेशान हो जाएगा। पढ़ाई में मन ना लगने का एक प्रमुख कारण ये भी हो सकता है।

बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका क्या है?

यहाँ हमने बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका क्या है? इसके बारे में विस्तार से चर्चा की है, जिसकी मदद से आप अपने बच्चे का मन पढाई में लगा सकेंगे।

उचित माहौल

आज के समय में बच्‍चों को पढ़ाई से दूर करने की वजह सबसे बड़ी ये होती है कि लोगों के घरों में पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाता है। माता पिता ये तो चाहते हैं कि उनका बच्‍चा पढ़ाई में सबसे आगे रहे। पर उसके लिए उस तरह की कोशिश नहीं करते हैं कि जिसकी उसे जरूतर होती है।

उदाहरण के लिए बहुत से माता पिता अपने बच्‍चे को जब भी खेलते या घूमते देखते हैं तो उसे डांटने लगते हैं कि पढ़ता नहीं है। लेकिन वो ही माता पिता जब घर में कोई मेहमान आ जाता है और बच्‍चा पढ़ने बैठता है तो कहते हैं कि कल पढ़ लेना आज मेहमान आए हैं। कई बार तो ये भी कह देते हैं कि एक दिन में पढ़कर कुछ नहीं होने वालाा।

पढ़ाई के प्रति ये रवैया अच्‍छा नहीं होता है। बच्चों को पढ़ाने के लिए इस प्रकार का रवैया ना अपनाये, पढाई को हमेशा प्राथमिकता दें।

बच्‍चों पर बेवजह का दबाव ना बनाएं

बहुत से बच्‍चे पढ़ाई के साथ कई अन्‍य तरह के दबाव में जीवन जीते हैं। ऐसे में बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका यह है कि कि माता पिता उनके ऊपर बन रहे इस दबाव को कम करें। इसके लिए वो उनके साथ बैठें और बात करें। यदि आपका बच्‍चा आपसे दूर रहता है तो आप इस काम में फोन की मदद ले सकते हैं। साथ ही इस बात का विशेष ध्‍यान रखें क‍ि जब आप बच्‍चे से बात कर रहे हों तो उसके तनाव को कम करने वाली बातों पर जोर दें ना कि ऐसी बातें करें जो कि उसके तनाव को बढ़ा दे।

इस तरह की बात तब बेहद जरूरी हो जाती है जब आपका बच्‍चा अपनी इच्‍छा के मुताबिक परिणाम ना ला पा रहा हो। लगातार वो किसी ऐसे समय से गुजर रहा हो जिसकी उम्‍मीद उसे ना हो।

सख्‍ती की बजाय प्‍यार से काम लें

बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका यह है कि आप बच्‍चों के ऊपर आप सख्‍ती करना पहला नहीं अखिरी विकल्‍प के तौर पर रखें। जिन बातों को प्‍यार से सुलझाया जा सकता है उन्‍हें प्‍यार से सुलझाने की कोशिश करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो इससे आपके घर का माहौल भी शांत रहेगा। साथ ही आपके बच्‍चे का मन पढ़ाई में भी खूब लगेगा।

लेकिन इस बात का भी ध्‍यान रखें कि जब जरूरत हो तो आप सख्‍ती करने से परहेज भी ना करें। क्‍योंकि प्‍यार और सख्‍ती दोनों जरूरी होती है। बस ध्‍यान ये रखें कि किस चीज का कब प्रयोग करना है इसकी समझ जरूरी है।

छोटे बच्चों को पढ़ाने का तरीका

खिलौने और तस्‍वीरों का प्रयोग करें

छोटे बच्चों को पढ़ाने का तरीका बदल कर कुछ रोचक बनाये। छोटे बच्‍चों‍ को पढ़ाने के लिए आजकल बाजार में तमाम तरह के खिलौने भी आते हैं। जिनसे बच्‍चा खेलता भी है और पढ़ता भी है। यदि आपका बच्‍चा अभी एकदम छोटा है त‍ो आप उन खिलौनों का प्रयोग कर सकते हैं।

साथ ही यदि आपका बच्‍चा थोड़ा बड़ा हो चुका है तो ऐसे बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका यह है कि उसके लिए आप चित्रों वाली किताबें भी ला सकते हैं। जिनमें वो चित्रों को देखेगा, साथ ही उनमें रंग आदि करेगा तो इससे उसका ज्ञान बढ़ेगा। इस अनोखे तरीके को आप तब भी अपना सकते हैं जब आपका बच्‍चा स्‍कूल भी नहीं जा रहा हो।

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बच्‍चे को स्‍कूल में किसी तरह की परेशानी होना

स्‍कूल में बहुत तरह के बच्‍चे होते हैं। लेकिन कई बार बच्‍चे आपस में किसी बात को लेकर झगड़ा कर लेते हैं। जिससे शरीफ बच्‍चे बेहद परेशान हो जाते हैं। ऐसे में यदि आपके बच्‍चे को भी इस तरह से स्‍कूल में कोई परेशान कर रहा होगा तो आपका बच्‍चा घर में पढ़ नहीं पाएगा। इससे बचने के लिए आपको नियमित तौर पर स्‍कूल में जाते रहना चाहिए।

साथ ही अपने बच्‍चे से भी नियमित तौर पर पूछते रहना चाहिए। यदि स्कूल में उसे कोई बच्‍चा या अध्‍यापक परेशान कर रहा है तो आपको इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए और उसके स्‍कूल में इस बात को पहुंचानी चाहिए।

सफलता के साथ असफलता का महत्‍व भी बताएं

इस जीवन में हर कोई बिना असफल हुए सफल नहीं हुआ है। लेकिन बहुत से लोग असफलता से इतने घबरा जाते हैं कि वो आगे प्रयास ही करना छोड़ देते हैं। इसलिए आप अपने बच्‍चे को समय समय पर असफलता का महत्‍व भी बताते रहें। ताकि जब कभी आपका बच्‍चा असफल हो तो उससे निराश होने की बजाय उसके कारण तलाशने की कोशिश करे। इसके बाद जब अगला प्रयास करे तो सफल हो।

छोटे बच्चों को पढ़ाने का तरीका मालूम होते हुए भी यदि आप उन्हें असफलता में हार ना मानने की शिक्षा नहीं देते है, तो बच्चों को पढ़ाने के लिए किसी भी तरीके का कोई फायदा नहीं है। क्युकी यह जरुरी नहीं हर बच्चा हर जगह में एक बार में ही सफल हो जाय।

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पढ़ने में आप बच्चे की मदद करें

आपका बच्‍चा कितना भी बड़ा हो लेकिन वो कभी भी पढ़ाई में बड़ा नहीं हो पाता। इसे आप इस बात से समझ सकते हैं कि एक पहली कक्षा के बच्‍चे के लिए हमेशा पांचवी कक्षा मुश्किल लगेगी। जबकि एक 12 वीं के बच्‍चे के लिए हमेशा MA बेहद मुश्किल लगेगी।

इसलिए यदि आप अपने बच्‍चे की कक्षा को पहले पास कर चुके हैं तो जब आपका बच्‍चा किसी नई कक्षा में जाए तो उसे इस बात को अवश्‍य समझाएं कि आपको पूरे साल किस तरह पढ़ना है। जिससे साल के अंत तक आपका पूरा सेलेब्‍स पूरा हो जाए।

साथ ही किन चीजों पर उसे ज्‍यादा ध्‍यान देने की जरूरत होगी। इसके बाद यदि उसका सही टाइम टेबल नहीं बन रहा है तो भी आप उसके लिए एक अच्‍छा सा टाइम टेबल बना कर दें। इससे आपका बच्‍चा परीक्षा के दौरान किसी तरह का तनाव नहीं लेगा। साथ ही पूरे साल उसे पढ़ने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

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बच्‍चों का Vision हमेशा साफ रखें

विजन से हमारा मतलब यहां आंखों का Vision कतई नहीं है। इसका मतलब आपके बच्‍चे का आने वाले भविष्‍य के प्रति विजन है। आपके बच्‍चे को बचपन से ही पता होना चाहिए कि उसे आगे चलकर क्‍या करना है। साथ ही उस लक्ष्‍य तक पहुंचने के लिए सबसे बेहतर रास्‍ता क्या है। यदि इस तरह से होगा तो आपका बच्‍चा हमेशा से अपने लक्ष्‍य के प्रति समर्पित भाव से काम करेगा।

इसके लिए जरूरी है कि माता पिता अपने बच्‍चे को बताएं कि यदि वो ये विषय पढ़ता है तो इससे  ये बना जा सकता है। इस विषय में आगे चलकर इतनी मेहनत करनी पड़ेगी। साथ ही किस विषय में आगे चलकर बेहतर संभावनाएं बनती दिखाई दे रही हैं। यदि वो खुद नहीं जानते तो अपने बच्‍चे को करियर काउंसलर के पास भी ले जा सकते हैं। वो इस काम में आपके बच्‍चे की मदद कर सकता है।

कभी भी दो लक्ष्‍य लेकर ना चलें

बहुत से बच्‍चे हमेशा दो लक्ष्‍य लेकर चलना पसंद करते हैं। लेकिन यदि आपके बच्‍चे के साथ ही ऐसा हो रहा है तो दोनों में से कोई एक लक्ष्‍य चुनने को कहिए। क्‍योंकि ऐसा अक्‍सर होता है कि जब हम दो नावों पर पैर रखते हैं तो कभी भी मंजिल तक नहीं पहुंचते हैं।

यदि वो इस तरह से दो लक्ष्‍य बनाकर चलेगा तो आगे चलकर उसे खुद भी समझ नहीं आएगा कि अब वो इस चीज को पढ़े या उस चीज को। ऐसे में वो पढ़ाई से दूर होता चला जाएगा। साथ ही कड़ी मेहनत के बाद भी मंजिल तक नहीं पहुंच पाएगा। क्‍योंकि वो दो नावों पर पैर रखकर चला था।

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बच्‍चों को खुला माहौल दें

बहुत से माता पिता होते हैं जो कि हमेशा अपने बच्‍चों को बांध कर रखना चाहते हैं। उनका बच्‍चा कहां जा रहा है। क्‍या कर रहा है। वो सबकुछ जानकारी रखते हैं। यकीन मानिए कि छोटे बच्चों को पढ़ाने का तरीका यह बिलकुल नहीं है।
ऐसे में आपका बच्‍चा संभव है कि तनाव में आ जाएगा। इसलिए जरूरी है किे आप बच्‍चे को भी खुला माहौल दें। उम्र के हिसाब से उसे थोड़ी छूट दें। जब वो खुद घर से बाहर निकलेगा तो तमाम लोगों से मिलेगा। ऐसे में उसे समाज की समझ पैदा होगी। जो कि उसे आगे चलकर बेहद काम आएगी।

बस आप ध्‍यान ये रखें कि आपका बच्‍चा कहीं समाज में गलत लोगों की संगत में ना जाए। क्‍योंकि इस समाज में अच्‍छे लोग तलाश करने से भी नहीं मिलेंगे, जबकि गलत लोग आपको हर गली में मिल जाएंगे।

Conclusion

बच्चे इस देश का भविष्य है, इसलिए उन्हें किसी प्रकार की हिंसा या अनैतिक चीजो से दूर रखे। हम जो करते है उसका प्रभाव बच्चे पर अवश्य पड़ता है, चाहे वह अच्छे काम हो या बुरे। आशा है इस लेख में बताया गया बच्चों को पढ़ाने का अनोखा तरीका आपके और आपके बच्चे के लिए लाभकारी होगा।

नमस्कार दोस्तों, मैं रवि "आल इन हिन्दी" का Founder हूँ. मैं एक Economics Graduate हूँ। कहते है ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता कुछ इसी सोच के साथ मै अपना सारा ज्ञान "आल इन हिन्दी" द्वारा आपके साथ बाँट रहा हूँ। और कोशिश कर रहा हूँ कि आपको भी इससे सही और सटीक ज्ञान प्राप्त हो सकें।

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