Digital visiting card kya hai | डिजिटल कार्ड कैसे बनाएं?

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Digital Visiting Card के फायदे और नुकसान?

Digital visiting card kya hai: Visiting Card आपने कई बार देखा होगा। जब भी आप किसी दुकान या शौरूम में गए होंगे और आपने उनसे वहां का फोन नम्‍बर या पता मांगा होगा तो आपको उनकी तरफ से एक कार्ड दे दिया जाता है। इसी छोटे से कार्ड को ‘Visiting Card’ कहा जाता है। पुराने समय में जहां केवल Visiting Card ही होता था। तो आज के जमाने में यह Digital Visiting Card का रूप ले चुका है। जो कि आज के समय में बेहद चलन में है।

यदि आप इसके बारे में नहीं जानते हैं तो हमारे इस लेख को अंत तक पढि़ए। अपने इस लेख में हम आपको बताएंगे कि Digital visiting card kya hai और डिजिटल कार्ड कैसे बनाएं। इसके क्‍या फायदे होते हैं और क्‍या नुकसान होते हैं।

Visiting Card किस काम आता है?

Visiting Card काफी पुराने समय से चले आ रहे हैं। आमतौर पर यह एक कार्ड नुमा छोटे आकार का कागज होता है। जो कि किसी भी आदमी के पर्स या जेब में आसानी से आ सकता है। लेकिन यह आकार में जितना छोटा होता है।

इसके अंदर जानकारियां भी उतनी ही ज्‍यादा दी गई होती हैं। जैसे कि इसके अंदर दुकान या संस्‍थान का नाम, उसका मोबाइल नंबर और पता। साथ ही उस जगह पर आपको क्‍या क्‍या मिल सकता है। जिसके लिए आप वहां संपर्क कर सकते हैं। यदि वहां दूसरे लोगों से कुछ अलग है तो आपको उसके अंदर वह भी देखने को मिल सकता है। इनकी खास बात ये है कि ज्‍यादातर ये रंगीन और आकर्षक होते हैं।

कई बार Visiting Card के एक तरफ ही लिखा होता है। लेकिन जरूरी होने पर इसके पीछे भी कुछ जानकारियां दी जा सकती हैं। इसे ही Visiting Card कहते हैं। दुकानदार इसे अपने ग्राहकों को हमेशा फ्री में देते हैं।

Digital visiting card kya hai

डिजिटल विजिटिंग कार्ड क्‍या होता है?

आइए अब हम आपको बताते हैं कि Digital visiting card kya hai Digital visiting card एक ऐसा कार्ड होता है। जिसे आप छू या हाथ में लेकर नहीं देख सकते हैं। ठीक उसी तरह जैसे आप अपने फोन में Save Photo देखते हैं।

उसी तरह का Digital Visiting Card भी होता है। इसके अंदर भी आपको नाम, पता, मोबाइल नंबर और वहां दी जाने वाली सेवाएं दी जाती हैं। लेकिन आकार में यह थोड़ा बड़ा होता है। जिसे आप अपने फोन की Screen में आसानी से पढ़ सकते हैं। साथ ही आकर्षण का भी इसके अंदर विशेष ध्‍यान रखा जाता है।

कई बार तो ऐसा Digital Visiting Card भी तैयार किया जाता है। जिसके अंदर रंग और अक्षर तक बदलते रहते हैं। जिससे पढ़ने में यह और भी आकर्षक लगता है। आज के दौर में इसका चलन बेहद तेजी से बढ़ता जा रहा है। क्‍योंकि यह लोगों को सस्‍ता पड़ता है।

Digital Visiting Card कैसे बनाया जाता है?

यदि हम Digital Visiting Card के बनाने की बात करें तो यह हर कोई नहीं बना सकता है। इसे केवल वही बना सकता है। जिसे कंम्‍प्‍यूटर और इसके बारे में अच्‍छी जानकारी हो। इसे बनाने के लिए बहुत से लोग कोर्स तक करके आए होते हैं। इसलिए अक्‍सर Visiting Card बनाने की दुकानें आपको चौक चौराहों पर मिल जाएंगीं। जिन्‍हें Graphics designing का ज्ञान होता है वो लोग ये काम करते हैं। आप वहां जाकर जैसे ही बताएंगे कि आपका इस तरह का काम है और आपको उसके लिए Visiting Card चाहिए होगा। तो वो लोग आपसे उससे जुड़ी सभी जानकारी मांगेंगे और कुछ समय के अंदर ही आपको एक Digital Visiting Card बना कर दे देंगे। अब इसे आप अपने फोन में देख भी सकते हैं। साथ ही अपने परिचितों को भेज भी सकते हैं। यदि आप चाहें तो इसे उसी समय प्रिंट भी करवा सकते हैं।

घर पर कैसे बनाएं Digital Visiting card?

यदि आप दुकान पर नहीं जाना चाहते हैं तो आप अपने घर पर भी विजिटिंग कार्ड बना सकते हैं। आज के समय में मोबाइल पर कई ऐसे एप्‍लीकेशन मौजूद हैं। जिनकी मदद से आप अपने मोबाइल या लैपटॉप पर ही डिजिटल विजिटिंग कार्ड बना सकते हैं। इसके लिए आप अपने फोन के You Tube में जाकर Digital Visiting Card Tutorial Video देखना होगा। जिसके अंदर आपको बताया जाएगा कि आप किस तरह से अपने घर पर ही डिजिटल विजिटिंग कार्ड बना सकते हैं। इसके बाद आप उसी तरीके को अपनाकर अपने फोन या लैपटॉप की मदद से डिजिटल विजिटिंग कार्ड बना लीजिए। लेकिन हम आपको यहां एक बात स्‍पष्‍ट कर दें कि यदि आप Professional Visiting Card बनवाना चाहते हैं। तो इसके लिए आपको किसी अच्‍छी दुकान पर ही जाना उचित रहेगा।

ध्‍यान रखने योग्‍य बातें

  • किसी भी Visiting Card को बनाने में सबसे पहली बात ये होनी चाहिए कि आप उसके अंदर जो भी जानकारी दें वो एकदम सही सही हो। ऐसा ना हो कि ग्राहक जब आपकी दुकान पर आए तो उसे निराश होना पड़े। इससे आपकी छवि खराब होती है।
  • यदि आपकी दुकान पर दूसरों से कुछ अलग या किसी चीज पर छूट आदि दी जा रही है तो उसे कार्ड पर अलग से जरूर दिखा दें।
  • इसके अलावा आप जो भी अपने कार्ड में फोन नंबर या मिलने का पता दे रहे हों। वह एकदम सही हो जिससे कोई भी इंसान बात करने के साथ आपसे आसानी से मिल भी सके।
  • यदि कार्ड के पीछे लिखने की बात आए तो वहां केवल वही बात लिखें जिसे यदि कोई ना भी देखे तो भी परेशानी ना हो। अक्‍सर कार्ड के पीछे लोग अपनी दुकान या शौरूम तक आने का रास्‍ता एक Map के जरिए समझाते हैं। इसलिए आप भी ऐसा कर सकते हैं।
  • यदि आप डिजिटल कार्ड बनाने जा रहे हैं तो उसके अंदर अपनी दुकान या शौरूम की Google Maps का Location Link भी जरूर डाल दें। इससे कोई भी इंसान सीधा उस लिंक पर क्लिक करके आपके पास पहुंच सकता है।
  • आप डिजिटल या प्रिंट कैसा भी कार्ड बनवाने जा रहे हों। सभी के अंदर इस बात का जरूर ध्‍यान रखें कि कम शब्‍दों में ज्‍यादा बात कही गई हो। अक्‍सर ज्‍यादा लंबी चौड़ी बात लोग देखकर ही अनदेखा कर देते हैं।
  • Digital Visiting Card बनवाने यदि आप दुकान पर जा रहे हैं। तो पहले आराम से कई Visiting Card देख लें। इसके बाद जो आपको सबसे अच्‍छा लगे उसे ही फाइनल करके बनवाएं। क्‍यों‍कि Visiting Card कई सालों के लिए बनता है।

डिजिटल विजिटंग कार्ड के फायदे

  • यह पूरी तरह से डिजिटल होता है। जिससे आपका काफी खर्चा बच जाता है। क्‍योंकि आप एक कार्ड को कितने भी लोगों तक भेज सकते हो। जिससे एक तरह से आपके काम का प्रचार प्रसार भी हो जाता है।
  • इस कार्ड के अंदर यदि आप चाहें तो अपनी Website या Gmail आदि का link भी प्रदान कर सकते हैं। जिससे उस Link पर क्‍लिक करने मात्र से वो खुलकर सामने आ जाएगा।
  • Digital Visiting Card के अंदर यदि आप कुछ बदलाव करवाना चाहते हैं तो वो भी संभव है। क्‍योंकिे यह पूरी तरह से डिजिटल है तो इसमें आपका किसी तरह का नुकसान भी नहीं होगा।
  • इसमें आपके पास कई विकल्‍प होते हैं जैसे कि आप चाहें तो इसे PDF में Gif, JPG, PNG, Short video में भी बनवा सकते हैं। साथ ही आप चाहें तो इसे इस तरह से भी बनवा सकते हैं जिसमें आपको रंग और आकार बदलते दिखाई दें।
  • ऑनलाइन होने के चलते आप ये भी जान सकते हैं कितने लोगों ने आपका Visiting Card खोलकर देखा और कितने लोगों ने आपके लिंक पर क्‍लिक किया। जिससे आपको काफी चीजें समझने में आसानी रहेगी।
  • इसे लोगों तक पहुंचाने में खर्चा भी कम लगता है। जबकि इसके उलट यदि आप एक प्रिंट कार्ड लोगों को देते हैं। तो इसमें कार्ड के साथ लोगों को देने में भी आपको काफी मशक्‍कत करनी पड़ सकती है।
  • डिजिटल विजिटिंग कार्ड की खास बात ये होती है किे यदि आपके पास किसी एक इंसान का Whats app, Facebook, Email में से कुछ है तो आप उसे समय समय पर नया कार्ड भेज सकते हैं। जैसे कि दीवाली सेल के बाद नए साल का ऑफर और फिर होली का। जबकि प्रिंट कार्ड देने के लिए आपको उस इंसान से फिर एक बार मिलने जाना होगा।
  • Digital Visiting Card आपको एक और सुविधा देता है। जिसे ‘Two way Communication’ कहा जाता है। इसके अंदर जिसे आपने कार्ड भेजा तो यदि उसके मन में कोई सवाल है तो आपसे उसी समय पूछ सकता है। जबकि प्रिंट कार्ड में य‍ा तो वो आपको फोन करेगा या उसे दोबारा से आपके शौरूम या दुकान में आना होगा।
  • Digital Visiting Card के अंदर आपको जगह की कोई कमी नहीं रहती है। जबकि प्रिंट कार्ड के अंदर आपको इस बात का ध्‍यान रखना होता है कि ये कार्ड एक पर्स के अंदर आ जाए।
  • डिजिटल कार्ड की खास बात ये भी रहती है कि यदि आपको भविष्‍य में कभी जरूरत पड़ती है, तो इसे आप प्रिंट भी करवा सकते हैं। जबकि एक प्रिंट कार्ड को आप कभी भी डिजिटल कार्ड में नहीं बदल सकते हैं।
  • डिजिटल विजिटिंग कार्ड को आपको सहेज कर रखने का झंझट भी नहीं रहता है। मान लीजिए आपने इसे किसी को Facebook, Whats App, Email आदि के जरिए भेजा तो इसे वो कभी भी किसी भी जगह खोल कर देख सकता है। जबकि प्रिंट कार्ड यदि कहीं खो गया तो समझिए आपका दिया कार्ड अब बस कूडेदान में ही फैंका जाएगा।
  • एक डिजिटल विजिटिंग कार्ड की कोई सीमा नहीं होती है। यानि इस कार्ड को आप चाहें तो पलक झपकते ही सात समुंदर पार बैठे इंसान को भी भेज सकते हैं। जबकि एक प्रिंट कार्ड को देने के लिए आपको उसके पास जाना होगा। जिसमें समय और पैसा दोनों बर्बाद होगा।

Digital Visiting Card के नुकसान

  • इसका सबसे बड़ा नुकसान तो यही है कि इसे आप किसी इंसान से मिलकर नहीं दे सकते हैं। इसके लिए आपको उसका मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया अकाउंट चाहिए होगा। यदि वो इंसान ये नहीं देता है तो आप चाहकर भी उसे अपना डिजिटल कार्ड नहीं भेज सकते हैं। चाहे वो आपके सामने खड़ा हो।
  • यदि आपके पास किसी इंसान का सोशल मीडिया अकाउंट है भी पर उसने आपको ब्‍लॉक कर दिया है तो आप उसे किसी भी तरह से अपना डिजिटल विजिटंग कार्ड नहीं भेज सकते हैं।
  • किसी भी इंसान को डिजिटल विजिटिंग कार्ड भेजने के लिए जरूरी है कि वो एक तो स्‍मार्ट फोन रखता हो। साथ ही उसके पास इंटरनेट कनेक्‍शन भी हो। इसके बिना आप कभी भी उसे अपना डिजिटल विजिटिंग कार्ड नहीं भेज सकते हैं।
  • आज के समय में इंटरनेट पर बहुत सी चीजें Fake आती रहती हैं। ऐेसे में यदि आप अपना Digital Visiting Card किसी अनजान व्‍यक्ति को भेजते हैं। तो कई बार वो उस पर दिए गए लिंक पर क्लिक करने से बचता है। उसे लगता है कि कहीं उसके खाते से पैसे ना काट लिए जाएं। जबकि वही इंसान Prinr Card को अच्‍छे से पढ़ता है।

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Conclusion

आशा है कि अब आप समझ गए होंगे कि Digital visiting card kya hai इसे जानने के बाद आप कहीं भी Digital Visiting Card का असानी से प्रयोग कर सकते हैं। साथ ही इसके फायदे और नुकसान से भी परिचित हो गए होंगे। यदि आपको हमारा ये लेख पसंद आया है तो इसे अपने दोस्‍तों के साथ भी शेयर करें। साथ ही इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है तो नीचे कमेंट करें।

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उम्र में युवा और तजुर्बे में वरिष्ठ रोहित यादव हरियाणा के रहने वाले हैं। पत्रकारिता में डिग्री रखने के साथ इन्होंने अपनी सेवाएं कई मीडिया संस्थानों को दी हैं। फिलहाल ये पिछले लंबे समय से अपनी सेवाएं 'All in Hindi' को दे रहे हैं।

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