ग्लोब किसे कहते हैं, GLOBE के प्रकार, अविष्कार और इतिहास

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ग्लोब किसे कहते हैं? | Globe kise kahate hain

Globe kise kahate hain अगर आपका भी सवाल यही है तो आप बिलकुल सही स्थान पर है यहाँ आज हम आपको बताएँगे कि ग्लोब किसे कहते हैं अर्थात ग्लोब क्या है, और इसका अविष्कार कब और कैसे हुआ।

Globe को रखा हुआ आपने कई जगह देखा होगा। लेकिन वर्तमान समय में इसका प्रयोग केवल सजावट के लिए ही किया जाता है। क्‍योंकि आज के समय मे हमारे पास गूगल मैप की सुविधा है। जिससे हम अपने फोन के जरिए ही किसी भी जगह के बारे में एक मिनट के अंदर जान सकते हैं। वो भी Globe से कहीं बेहतर तरीके से। लेकिन आज हम आपको Globe के बारे में बताने जा रहे हैं। आखिर Globe बना कैसे और कैसे इसने दुनिया के कामकाज को इतना आसान बना दिया।

इसलिए यदि आप ग्लोब किसे कहते हैं नहीं जानते हैं तो हमारे इस लेख को अंत तक पढि़ए। अपने इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ग्लोब क्या है? उसका प्रयोग किस तरह से किया जाता है? साथ ही उसकी क्‍या खूबियां होती हैं।

ग्लोब क्या है?

Globe के बारे में विस्‍तार से जानें इससे पहले आइए हम आपको एक बार बताते हैं कि ग्लोब किसे कहते हैं। Globe एक गोल गेंद के समान होता है। जिसके चारों तरफ दुनिया के देशों के नक्‍शे और समुद्र बने होते हैं।  साथ ही ये अपने अक्ष से थोड़ा सा झुका भी होता है। कई बार अनजान लोगों को लगता है कि इस Globe में किसी खराबी की वजह से ये झुक गया है।

लेकिन ऐसा नहीं होता है। ये इसलिए झुका होता है क्‍योंकि हमारी पृथ्‍वी भी अपने अक्ष पर थोड़ी सी झुकी हुई है। यदि हम इसे ध्‍यान से देखेंगे तो पाएंगे कि इस पर पूरी दुनिया के सभी देश और समुद्र बने हुए हैं। यदि हम चाहे तो इसे घुमाकर जान सकते हैं कि दुनिया का कौन सा देश किसी देश से कितना दूर है और उस देश से किस दिशा में है।

Globe का आविष्‍कार कब हुआ?

अभी आपने जाना कि ग्लोब किसे कहते हैं या globe kya hai चलिए अब एक नजर GLOBE के अविष्कार एवम इतिहास पर डालते है।

यदि हम Globe के आविष्‍कार के बारे मे बात‍ करें तो माना जाता है कि इसका आविष्‍कार साल 1492 में हुआ था। कहा जाता है कि इस दौरान जब पृथ्‍वी को जब अंतरिक्ष से देखा गया तो वह पूरी तरह से गोल दिखाई दी। इसके बाद एक पेंटर की मदद से जिस तरह से पृथ्‍वी दिखाई दी थी उसी तरह से ग्लोब को पेंट कर दिया गया।

पृथ्‍वी के गोल होने की वजह से इसे Globe कहा जाता है। लेकिन ग्‍लोग अंग्रेजी भाषा का शब्‍द नहीं है। ये एक लैटिन शब्‍द है। जिसका यदि हिन्‍दी में अर्थ निकाला जाए तो मतलब होता है ‘गोलाकार’ लेकिन इसके बाद से लगातार Globe में छोटे छोट बदलाव होते रहे। इसलिए यह तय करना बेहद कठिन काम है कि आखिरकार Globe का आविष्‍कार किसने किया। लेकिन ये जरूर कहा  जा सकता है कि Globe को जिसने भी बनाया हो पर आज इसका फायदा पूरी दुनिया उठा रही है।

ग्लोब के प्रकार | Types of Globes in hindi

आइए अब हम आपको Globe के प्रकार के बारे में बताते हैं। मुख्‍यत: Globe दो प्रकार का होता है। जिसमें पहला Terrestrial Globe होता है जबकि दूसरा Celestial Globe होता है। आइए हम आपको दोनों के काम के बारे में बताते हैं।

types of globes in hindi

स्थलीय ग्लोब ( Terrestrial Globe )

इस तरह के Globe का सबसे ज्‍यादा प्रयोग होता है। इसके अंदर यदि आप किसी भी देश के बारे में जानना चाहते हैं। तो आपको उससे जुड़ी पूरी जानकारी मिल जाएगी। जैसे कि किसी देश के राज्‍य, नदियां, पहाड़, पर्वत आदि। जो लोग भूगोल में दिलचस्‍पी रखते हैं आमतौर पर उनके घर आप इस तरह के Globe को देख सकते हैं। साथ ही स्‍कूल मे अध्‍यापक इसी की मदद से बच्चों को समझाते हैं।

आकाशीय ग्लोब ( Celestial Globe )

इस तरह का Globe आम आदमी बेहद कम प्रयोग करता है। क्‍योंकि इसके अंदर आपको खगोलिय पिंडों की की जानकारी दी गई होती है। इसकी मदद से आप खगोल के बारे में जानकारी जुटा सकते हैं। इसलिए इसका प्रयेाग केवल वही लोग करते हैं जो कि खगोल शास्त्र में दिलचस्‍पी रखते हैं और उससे जुड़ी जानकारी जुटाना चाहते हैं।

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Globe और Map में क्‍या अंतर होता है?

बहुत से लोगों को लगता है कि Globe और मानचित्र एक ही चीज होती है। हम दोनों में से किसी का भी प्रयेाग कर सकते हैं। लेकिन ऐसा बिल्‍कुल भी नहीं है। ये दोनों ही अलग तरह की चीज होती हैं और दोनों का अलग काम होता है।

इनमें पहला अंतर तो यह होता है कि Globe पूरी दुनिया को ध्‍यान में  रखकर बनाया जाता है। जिसमें आप आप केवल दुनिया के देश और समुद्र की देख सकते हैं। इसके अंदर किसी विशेष देश पर फोकस नहीं होता है। जबकि मानचित्र किसी एक चीज को लेकर बनाया जाता है।

जैसे कि आप भारत का मानचित्र को देखते हैं उसमें भारत के राज्‍य, उसके पड़ोसी देश और प्रमुख चीजें दी गई होती है। इसी तरह आप चाहें तो नदी, नाले, पहाड़, पर्वत आदि के विशेष Map भी ले सकते हैं। जिसमें आप उस विषय के बारे में बारीकी से जान सकते हैं। लेकिन यदि हम Globe की बात करें तो उसके अंदर ऐसी सुविधा नहीं होती है।

Globe देखने का सही तरीका क्‍या है?

ग्लोब किसे कहते हैं यह समझने के बाद आइए अब हम आपको बताते हैं कि यदि आपके पास Globe है और आपको उसे देखना नहीं आता है। तो आप उसे किस तरह से देख सकते हैं और जान सकते हैं कि Globe का वास्‍तव में क्‍या क्‍या फायदा होता है। लेकिन हम यहां हम आपसे कहना चाहेंगे कि आप कभी भी Globe को दूर से ना देखें। इसे समझने के लिए आप जिस तरह का कापी अपने सामने रखते हैं उसी तरह से इसे अपने सामने रख लें।

globe kya hai

पृथ्‍वी का अक्ष (Axis of Earth)

सबसे पहले जब आप Globe अपने समाने रखेंगे तो पाएंगे कि यह एक दिशा में झुका हुआ है। जो कि लगभग साढ़े 66 डिग्री होता है। ठीक इसी तरह से हमारी पृथ्‍वी भी झुकी हुई है। इसी वजह से पृथ्‍वी पर हम देखते हैं कि कभी गर्मी और कभी सर्दी आती है। यदि ऐसा ना होता तो हम पृथ्‍वी पर कभी मौसम को बदलते हुए नहीं देख सकते थे। इसके झुके होने से आप समझ सकते हैं कि कौन सा देश कब सूरज के पास होता है और कौन सा देश कब सूरज से दूर चला जाता है।

अक्षांश रेखाएं (Latitude Lines)

अब आप देखेंगे कि पृथ्‍वी पर कुछ लेटी हुई लाइनें बनाई गई हैं। जो कि एक तरह से पृथ्‍वी को बांटने का काम करती हैं। इनमें यदि हम बीच की रेखा की बात करें तो उसके ऊपर का हिस्‍सा उत्‍तरी गोलार्ध कहलाता है। जबकि नीचे का हिस्‍सा दक्षिणी गोलार्ध कहलाता है। ये एक तरह से पृथ्‍वी को दो भागों में बांट देती हैं। ताकि पृथ्‍वी को समझना आसान हो सके।

ये सभी रेखाएं आपको पूर्व से पश्चिम की तरफ जाती हुई दिखाई देगीं। यदि हम इनकी कुल संख्‍या की बात करें तो यह 180 रेखा हैं। इनका काम ये होता है कि जब हमें दुनिया के किसी भी देश की स्‍थिति के बारे में बताना होता है। तो इनकी मदद से उसे हम आसानी से बता सकते हैं। क्‍योंकिे इनमें हर रेखा की एक डिग्री होती है। जिससे हम उसकी Location जान सकते हैं। यहां हम एक बात स्‍पष्‍ट कर दें कि ये रेखांए महज काल्‍पनिक हैं। वास्तव में पृथ्‍वी पर ऐसी कोई रेखा नहीं दी गई है।

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देशांतर रेखाएं (Longitude Lines)

जिस तरह से हमने आपको ऊपर बताया कि पृथ्‍वी पर बहुत सारी लेटी हुई रेखाएं बनाई गई हैं। इसी तरह पृथ्‍वी पर बहुत सारी खड़ी रेखाएं भी बनाई गई हैं। इनका प्रयोग किसी भी Location को बताने के साथ समय बताने के लिए भी किया जाता है।

पृथ्‍वी के बीच से गुजरने वाली सबसे बीच की रेखा को मानक समय माना गया है। इसके बाद यदि आप पूर्व में आते हैं, तो समय में उसी तरह से परिवर्तन आता जाएगा। जबकि यदि आप पश्चिम में जाते हैं तो दूरी के हिसाब से समय बदलता जाएगा। इस तरह की लाइनों की कुल संख्‍या 360 है यदि हम एक लाइन से दूसरी लाइन की दूरी की बात करें तो वो 111 किलोमीटर है।

यदि हम एक लाइन से दूसरी लाइन पर जाते हैं तो समय में 4 मिनट का अंतर हमें देखने को मिलेगा। लेकिन जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि ये लाइनें महज काल्‍पनिक हैं। पृथ्‍वी पर ऐसी कोई लाइन मौजूद नहीं है। जिसे हम देख सकें।

प्रमुख रेखाओं के नाम

क्‍योंकि Globe बेहद विस्‍तृत होता है। ऐसे में Globe को समझने में आसानी रहे। इसके लिए Globe में जो रेखाएं दी गई होती हैं। उनके कुछ नाम रखे हुए हैं। ताकि जब भी कोई उन रेखाओं के नाम लें तो उसे आसानी से समझ आ जाए कि Globe में कहां की बात हो रही है। ये नाम किताबों में भी हमें देखने को मिलते हैं।

विषुवत रेखा: 0 डिग्री अक्षांश

कर्क रेखा: साढ़े 23 डिग्री उत्‍तरी अक्षांश की रेखा

मकर रेखा: साढे 23 डिग्री दक्षिणी की रेखा

उष्‍ण कटिबंध: कर्क और मकर रेखाओं के बीच के स्‍थान को

मानक समय रेखा: खड़ी रेखाओं में पृथ्‍वी के सबसे बीच से गुजरने वाली रेखा को

उत्‍तरी ध्रुव: पृथ्‍वी के सबसे ऊपर का कोना

दक्षिणी ध्रुव: पृथ्‍वी के सबसे नीचे का कोना

भारत का मानक समय क्‍या है?

यदि हम Globe के हिसाब से बात करें तो भारत का मानक समय साढ़े 82 डिग्री देशातंर रेखा को माना गया है। जो कि यूपी के इलाहाबाद में स्‍थित है। जबकि दुनिया का मानक समय 180 डिग्री लंदन के समय को माना जाता है।

इस तरह से यदि हम लोग लंदन के समय से अपने समय की गणना करें तो हमारा समय उनसे 5 घंटा 30 मिनट आगे रहता है। यानि जब वहां रात के 12 बारह बज रहे होंगे तो भारत में सुबह के 5 बजकर 30 मिनट का समय हो रहा होगा।

यहां हम आपको एक महत्‍वपूर्ण जानकारी और दे दें कि भारत की भौगोलिक स्‍थिति को देखते हुए कई बार ये भी मांग उठी है कि हमारे  यहां पर दो मानक समय हों। क्‍योंकि यदि भारत के पूर्व से पश्चिम में जाया जाए तो समय में काफी अंतर होता है। इस तरह से एक ही देश में कई Time Zone दुनिया के कई बड़े देशों में मौजूद हैं।

Globe की कुछ विशेषताएं

  • Globe के जरिए आप देख सकते हैं कि दुनिया में कौन सा देश कहां पर है। साथ ही उसकी सीमाएं किन देशों के साथ लगती है। इसके अलावा आप जिस देश में रहते हैं उससे उस देश की दूरी कितनी है। साथ ही उस देश में जाने के लिए समुद्री रास्‍ता है या केवल हवाई मार्ग ही है।
  • Globe के जरिए आप दुनिया के सभी देशों का नक्‍शा और उनके भौगोलिक आकार और उनकी राजधानी और प्रमुख शहर भी देख सकते हैं।
  • ग्लोब में दुनिया की प्रमुख नदी भी आप देख सकते हैं। इसके साथ ही जान सकते हैं कि कौन सी नदी का उद्गम किस देश में होता है और वो कहां जाकर गिरती है।
  • Globe के जरिए आप जान सकते हैं कि दुनिया के महासागर कहां कहां स्‍थित हैं। साथ ही उनके किनारे पर कौन से देश बसे हैं।
  • कई Globe में देशों की राजधानी के साथ उस देश की बड़ी बड़ी जगहों के नाम भी दिए जाते हैं। जिसकी मदद से आप जान सकते हैं कि किसी देश की मशहूर जगह कौन सी है और वो वहां पर कहां स्‍थित है।
  • जब आपके सामने Globe होता है तो उसके अंदर देश की स्‍थिति को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस दौरान उस देश में सुबह, दोपहर, शाम या रात में से क्‍या हो रही होगी।
  • Globe एक तरह से Geography के विधार्थियों के लिए वरदान साबित हुआ है। इसके बिना मानो Geography की कल्‍पना ही नहीं की जा सकती है।

आज आपने जाना globe kya hai और ग्लोब किसे कहते हैं, इसके साथ साथ ग्लोब की विशेषताएं और Globe देखने के सही तरीके के बारे में, आशा है अब आप यह समझ चुके होंगे कि Globe kise kahate hain. यह जानकारी आपको कैसी लगी हमें कमेंट में लिखे और इस लेख को अपने दोस्तों तक भेजकर आल इन हिन्दी को सपोर्ट करें।

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नमस्कार दोस्तों, मैं रवि "आल इन हिन्दी" का Founder हूँ. मैं एक Economics Graduate हूँ। कहते है ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता कुछ इसी सोच के साथ मै अपना सारा ज्ञान "आल इन हिन्दी" द्वारा आपके साथ बाँट रहा हूँ। और कोशिश कर रहा हूँ कि आपको भी इससे सही और सटीक ज्ञान प्राप्त हो सकें।

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