Internet kya hai | इंटरनेट की खोज किसने की?

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इंटरनेट का मालिक कौन है?

Internet kya hai: आज के समय में युवा आबादी को रोटी, कपड़ा और मकान के साथ इंटरनेट भी बेहद जरूरी चीज हो गई है। लोगों के लिए आज इंटरनेट सिर्फ जानकारी पाने का आज एक साधन मात्र नहीं रह गया है, बाल्कि लोगों ने इसे अपने मनोरंजन का भी एक साधन बना लिया है।

लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि इंटरनेट की खोज किसने की? इंटरनेट की खोज कब हुई? इसे किस तरह से आज हम इतनी आसानी से अपने मोबाइल फोन पर भी प्रयोग कर सकते हैं। यदि नहीं तो चलिए जानते हैं कि Internet kya hai, Internet ki khoj kisne ki

इंटरनेट क्‍या है?

इंटरनेट की खोज किसने की इस बारे में हम आपको जानकारी दें इससे पहले आइए हम आपको बताते हैं कि इंटरनेट क्‍या है। दरअसल, यह एक तरह से यह सूचनाओं का सागर है। जिसके अंदर हम जब चाहें जो चाहें वो खोज सकते हैं। खास बात ये है इंटरनेट हमसे सूचनाएं प्रदान करने का कोई भी शुल्‍क नहीं लेता है। हम इंटरनेट चलाने का जो शुल्क देते हैं वो केवल इंटरनेट को सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए एक तरह से केवल मरम्‍मत का खर्च होता है।

इंटरनेट की खोज किसने की

इंटरनेट की खोज किसने की थी?

आइए अब हम अपने मूल सवाल पर आते हैं कि इंटरनेट की खोज किसने की थी। इसका जवाब अमेरिका (USA) है। यदि आप ये जानना चाहते हैं कि अमेरिका के अंदर इसकी खोज किसने की, तो इसमें सबसे बड़ा नाम Vinton Cerf & Bob का नाम सबसे पहले लिया जाता है। हालांकि, इनके साथ मिलकर कई हजार लोगों ने भी इस काम में अपना योगदान दिया है।

साथ ही यदि आप आज जानना चाहें कि इंटरनेट का मालिक कौन है। तो इसका जवाब किसी के पास नहीं है। क्‍योंकि इंटरनेट का एकाधिकार एक समय में अमेरिका के पास जरूर था, लेकिन अब इसका एकाधिकार किसी भी देश के पास नहीं रह गया है।

इंटरनेट की खोज कैसे शुरू हुई?

आइए अब हम आपको क्रमवार तरीके से बताते हैं कि इंटरनेट की खोज अमेरिका में कैसे शुरू हुई साथ ही क्‍यों अमेरिका ने इसे पूरी दुनिया के लिए फ्री में उपलब्‍ध करवा दिया। जिससे आज हम इंटरनेट का प्रयोग बिना किसी परेशानी के कर पाते हैं।

1960 में शीत युद्ध का समय

बात 1960 के दशक ही है। इस दौरान अमेरिका और रूस के बीच शीत युद्ध काफी चरम पर था। लेकिन इस शीत युद्ध को लेकर अमेरिका के मन में डर था कि यदि रूस के द्वारा कहीं भी परमाणु हमला कर दिया गया तो पूरे देश का संचार सिस्‍टम ठप पड़ जाएगा। जो कि उस समय इतना विकसित नहीं था। जिसके बाद नेता, मंत्री और सेना और अफसरों के बीच संवाद एक तरह से समाप्‍त हो जाएगा।

इससे निपटने के लिए अमेरिका ने योजना बनाई कि क्‍यों ना एक अंडरग्राउंड केबल (Under Ground Cable) बिछाई जाए। जिससे पूरे देश के सभी कार्यालय और सेना से जुड़ी सभी चीजों को जोड़ा गया हो। साथ ही इसका कोई प्रमुख केन्‍द्र ना हो। जिससे इसे नष्‍ट किया जा सके। यानि यदि इसका केन्‍द्र न्‍यूयोर्क (New York) या कोई दूसरा शहर हुआ तो संभव है कि वहां हमला करके फिर से हमारी संचार व्‍यवस्‍था ठप कर दी जाए।

ARPA की कैसे हुई शुरूआत?

अमेरिकी सरकार के इस आदेश पर वहां की एक कंपनी ने इस योजना पर काम करना शुरू भी कर दिया। जिसे ARPA का नाम से जाना जाता है। इस एजेंसी ने कुछ ही समय में पूरे अमेरिका में इस तरह से केबल बिछा दी। जिससे सभी सरकारी विभाग, सेना के कार्यालय और आपात समय में जहां से भी सूचनाएं मिलने की संभावना थी।

उसे तारों के साथ जोड़ दिया गया। यानि यदि देश पर हमला होता है तो भी अमेरिका के राष्‍ट्रपति किसी भी बंकर में छुपे हैं तो वहां से भी अपनी सेना और आदेश दे सकते हैं। साथ ही अफसरों की मदद से बाहर के हालात जान सकते हैं। खास बात ये थी कि इसका कोई केन्‍द्र नहीं बनाया गया था। जिससे इस पूरे सूचना तंत्र को कभी भी एक साथ नष्‍ट नहीं किया जा सकता था।

शीत युद्ध के बाद

अंत में आगे चलकर 1980 के दशक में शीत युद्ध पूरी तरह से समाप्‍त होने की कगार पर आ गया। जिसके बाद अमेरिका को लगा कि इस तरह के सूचना तंत्र की अब उसको कोई जरूरत नहीं है। जिसके बाद इस पूरी प्रणाली को सार्वजनिक कर दिया गया। साथ ही अमेरिका ने वहां की एक एक संस्‍था को इसे सौप दिया। जो कि इसमें कुछ मूलभूत विकास करके इसका प्रयोग करने के लिए आम जनता को इसकी इजाजत दे सकती थी। क्‍योंकि अमेरिका एक पूंजीवादी देश नहीं है। इसलिए इसका कोई पैसा नहीं लिया गया।

WWW की खोज कैसे हुई?

अमेरिका की तरफ से विकसित किए गए इस सूचना तंत्र में एक सबसे बड़ी खामी ये थी कि इसमें एक दूसरे सिस्‍टम से केवल तभी सूचनाएं प्राप्‍त की जा सकती थी। जब उस सिस्‍टम के बारे में पता हो कि ये सूचना कहां और किस सिस्‍टम में है। साथ ही तार से जुड़े होने की समस्‍या भी काफी बड़ी थी। इसके बाद WWW की खोज हुई। जो कि World Wide web होता है। इसके बाद सारे कंम्‍प्‍यूटर इसी Domain Name से रजिस्‍टर होने लगे।

जिससे आप किसी भी कंम्‍प्‍यूटर से कोई भी सूचना लेना चाहें तो WWW की मदद से Search कर सकते थे। जिससे वो सर्वर में कहीं भी होगी आपके सामने निकल कर आ जाएगी।

इंटरनेट पूरी दुनिया में कैसे फैला?

इसके बाद जैसे ही अमेरिका ने ये तकनीक सार्व‍जनिक की तो दुनिया के कई देशों में प्राइवेट टेलीकॉम सर्विस ने इस तरह का नेटवर्क अपने स्‍तर पर बनाना शुरू कर दिया। जिसे आजकल आप LAN (Local Area Network) के नाम से जानते हैं। आगे चलकर इसे ही एक दूसरे के साथ जोड़ दिया गया। जिससे ये नेटवर्क एक दिन इतना बड़ा होता चला गया कि दुनिया के कई देश इस नेटवर्क से जुड़ गए और ARPANET को Internet के नाम से जाना जाने लगा। यानि एक साथ अनगिनत सिस्‍टम कनेक्‍टर होकर चलने लगे। हालांकि, उस समय इंटरनेट चलाना आज से कई गुना महंगा होता था।

भारत में इंटरनेट कब शुरू हुआ?

भारत में इंटरनेट की शुरूआत 15 अगस्‍त 1995 को हुई थी। हालांकि, भारत में इंटरनेट इससे पहले ही आ गया था। लेकिन इससे पहले इंटरनेट का प्रयोग केवल सेना और उसके कार्य के लिए ही किया जाता था। लेकिन इसके बाद से इंटरनेट के प्रयोग की इजाजत आम जनता को भी दे दी गई। भारत में पहली बार इंटरनेट की शुरूआत VSNL (Videsh Sanchar Nigam Limited) के माध्‍यम से की गई। लेकिन इसके बाद से इंटरनेट की कई प्रदाता कंपनी बाजार में आ गई। साथ ही इसके उपयोग कर्ता भी बढ़ते चले गए। जिससे इंटरनेट की कीमतें काफी कम हो गई।

इंटरनेट का मालिक कौन है?

अब आपके जहन में भी ये सवाल आ रहा होगा कि जब इंटरनेट इतनी बड़ी ताकत बन गया तो इसका कंट्रोल किसके हाथ में गया। इसका जवाब ये है कि इंटरनेट का मालिक आज भी कोई नहीं है। लेकिन आप इंटरनेट के प्‍लान का जो हर महीने भुगतान करते हैं। वो केवल इसे सुचारू रूप से चलाए रखने के लिए करते हैं। आपके इस भुगतान को कुल तीन चरणों में बांटा गया है। आइए इसे भी समझते हैं।

पहला चरण

इंटरनेट को एक दूसरे देशों से जोड़ने के लिए हर समुद्र में बहुत ही मोटी मोटी केबल बिछाई गई हैं। जो कि एक तरह से पूरी दुनिया के सूचना तंत्र या एक दूसरे सिस्‍टम को जोड़ने का काम करती है। समुद्र में केबल इसलिए बिछाई गई हैं। क्‍योंकि सेटेलाइट के माध्‍यम से इतनी सूचनाएं ना तो एक साथ भेजी जा सकती है। ना ही पुराने समय में ऐसी कोई तकनीक थी।

आज भी 95 प्रतिशत इंटरनेट का डाटा केबल के जरिए ही इधर से उघर जाता है। जबकि 5 प्रतिशत डाटा ही सेटेलाइट से इधर उधर होता है। समु्द्र में केबल बिछाने वाली कई कंपनी हैं जो कि इस काम को करती हैं और इसमें लगने वाला खर्च लेती हैं। लेकिन ये खर्च सीधा ग्राहकों से नहीं लेती हैं।

दूसरा चरण

यदि हम दूसरे चरण की बात करें तो कोई भी देश अपने स्‍तर पर करता है। यानि समुद्र में जो केबल बिछाई गई हैं। उनके माध्‍यम से अपने देश में इंटरनेट पहुंचाने के लिए देश के हर राज्‍य और हर शहर में केबल बिछाई जाती है। जिसे आप पुराने समय में वायर (Wire) वाला इंटरनेट कनेक्‍शन लगवाने पर देख भी सकते थे। ये काम भी देश की बड़ी बड़ी कंपनी करती थी। जिसके बाद टेलीकॉम कंपनी यानि एयरटेल, वोडाफोन, बीएसएनएल जैसी कंपनिया उनकी मदद से इंटरनेट लेती हैं और अपने ग्राहकों को इंटरनेट सेवाएं उपलब्‍ध करवाती हैं।

तीसरा चरण

तीसरे चरण में आपकी टेलीकॉम कंपनी की मदद से इंटरनेट आपके फोन या आपके दफ्तर तक आ जाता है। जिसका आप हर महीने 250 से लेकर 400 रूपए तक का भुगतान करते हैं। यानि आपने अपनी टेलीकॉम कंपनी को भुगतान किया। इसके बाद उसने कुछ पैसा बचाकर उस कंपनी को भुगतान किया जिसने पूरे देश में इंटरनेट की केबल बिछाई थी।

हालांकि, जियो (JIO) एक मात्र ऐसी टेलीकॉम कंपनी है। जिसने अपने ग्राहकों को इंटरनेट मुहैया करवाने के लिए पूरे देश में खुद की केबल को बिछाया हुआ है। इसके बाद देश में इंटरनेट की केबल बिछाने वाली कंपनी ने उस कंपनी को भुगतान किया जिस कंपनी ने समु्द्र में केबल बिछाने का काम किया था। जिससे वो अपनी सेवाएं ले रही थी।

फोन में इंटरनेट कैसे चलता है?

Internet kya hai जानने के बाद आइए हम अब आपको बताते हैं कि आपके फोन में इंटरनेट कैसे काम करता है। मान लीजिए। आपने गूगल पर कोई भी चीज तलाशनी चाही तो सबसे पहले वो इंटरनेट की तारों के माध्‍यम से गूगल के हेडक्‍वार्टर केलिफोर्निया के अंदर जाएगी। वहां से आपके तलाशने वाले Keyword से मिलती जुलती चीजें खोज ली जाएंगी। जिसके बाद उसे आपके फोन में भेज दी जाएंगी। जिसके बाद आप उनमें से अपनी पसंद की चीज पढ़ या देख सकते हैं। ये काम प्रकाश की गति की तेजी से होता है। इसलिए पलक झपकते ही आपको सारी सूचनाएं मिल जाती हैं।

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इंटरनेट से जुड़े रोचक तथ्‍य

  • इंटरनेट ने महज 5 साल में अपने पांच करोड़ उपभोक्‍ता बना लिए थे। जबकि टेलीविजन को पांच करोड़ दर्शक जोड़ने में 16 साल लग गए थे।
  • स्‍वीडन की कुल आबादी का 75 प्रतिशत हिस्‍सा इंटरनेट का प्रयोग करता है। इससे स्‍वीडन इंटरनेट का सबसे ज्‍यादा प्रयोग करने वाला देश है।
  • दुनिया में साउथ कोरिया और चीन ऐसे देश हैं। जहां के लोग आज भी इंटरनेट के प्रयोग नहीं कर सकते हैं। वहां की सरकार अपना एक अलग इंटरनेट चलाती है। जिसे वहां के लोग प्रयोग करते हैं।
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया की 19 प्रतिशत होनी वाली शादियां किसी ना किसी तरीके से इंटरनेट की मदद से ही जुड़ी होती हैं।
  • इंटरनेट प्रयोग करने वालों में एशिया की आबादी का 42 प्रतिशत हिस्‍सा शामिल है। जबकि एशिया के केवल 20 प्रतिशत लोग ही इंटरनेट का प्रयोग करते हैं।

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Conclusion

आशा है कि आप समझ गए होंगे कि Internet kya hai, Internet ki khoj kisne ki इसे जानने के बाद आप समझ गए होंगे कि जिस इंटरनेट पर आप चुटकी भर में कोई भी जानकारी तलाश लेते हैं। उसके पीछे कितने लोगों की मेहनत लगी होती है। तब जाकर कहीं हमारे पास इंटरनेट आता है और हम उसकी मदद से अपने जीवन को आसान बनाते हैं। यदि आपको हमारा ये लेख पसंद आया है तो इसे अपने दोस्‍तों के साथ भी शेयर करें। साथ ही यदि आपका कोई सवाल है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्‍स में लिखें।

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उम्र में युवा और तजुर्बे में वरिष्ठ रोहित यादव हरियाणा के रहने वाले हैं। पत्रकारिता में डिग्री रखने के साथ इन्होंने अपनी सेवाएं कई मीडिया संस्थानों को दी हैं। फिलहाल ये पिछले लंबे समय से अपनी सेवाएं 'All in Hindi' को दे रहे हैं।

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