IPC Dharaye kitni Hoti Hai | IPC धारा कितनी होती है लिस्ट

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IPC और CRPC क्‍या होती हैं?

IPC Dharaye kitni Hoti Hai; आपने टीवी और अखबारों में पुलिस की धारा के बारे में जरूर सुना होगा। जब भी कोई अपराधी अपराध कर देता है। तो पुलिस की तरफ से बताया जाता है कि इसके खिलाफ किन किन धाराओं में केस दर्ज किया गया है। लेकिन यदि आप अभी तक नहीं जानते हैं कि पुलिस की धारा कितनी होती हैं, तो हमारे इस लेख को अंत तक पढि़ए। अपने इस लेख में हम आपको बताएंगे कि धारा क्‍या होती है। IPC Dharaye kitni hoti Hai साथ ही CRPC क्‍या होती है। पुलिस के काम में‍ ये धारा किस तरह से ये अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

IPC क्‍या होती है?

IPC Dharaye kitni hoti Hai इस बारे में आपको जानकारी दें इससे पहले आइए आपको जानकारी दे देते हैं कि IPC होती क्‍या है। IPC एक तरह से कानून की किताब है जिसके अंदर जानकारी दी गई है कि किस अपराध की क्‍या सजा दी जाएगी। इसका पूरा नाम Indian Penal Code है। आपने देखा होगा कि अदालत में जज जब किसी अपराधी को सजा सुनाते हैं तो कहते हैं‍ कि फलां अपराधी को मुजरिम करार देते हुए धारा इतने के तरह एक वर्ष की कठोर कारावास और इतने जुर्माने की सजा सुनाई जाती है।

यदि हम IPC को अपनाने की बात करें तो इसे साल 1860 में अपनाया गया था। जबकि साल 1862 में इसे लागू कर दिया गया था। इस दौरान पहला विधि आयोग गठित हुआ था। जिसके चैयरमैन लार्ड मैकाले थे। इन्‍हीं की आगुवाई में IPC का डॉफ्ट तैयार किया गया था। जिसके बाद इसे संसद में पेश किया गया। वहां से पास होने के बाद साल 1962 में इसे देश में लागू कर दिया गया। इसलिए कई बार कहा जाता है कि हमारा पुलिस सिस्‍टम आज भी अंग्रेजों के समय का है।

इस तरह की IPC को लाने के पीछे मकसद एक ही था कि पूरे देश में एक ही कानून लागू हो। जो कि हर धर्म, संप्रदाय और जाति पर लागू होता हो। जिससे कानून की नजर में सभी लोग एक समान हो सकें। साथ ही इसके आ जाने से पुलिस किसी के साथ अन्‍याय भी नहीं कर सकती थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि IPC भारत के अंदर सबसे बड़ा कानून है। यदि IPC की किसी धारा के अंदर कोई अपराधी गुनहगार साबित हो जाता है, तो उसकी अंतिम सजा इसी के माध्‍यम से दी जाती है।

पुलिस की धारा कितनी होती है

IPC में कितनी धाराएं दी गई हैं?

आइए अब हम आपको बताते हैं कि IPC Dharaye kitni hoti Hai इसके अंदर कुल मिलाकर 511 धाराएं दी गई हैं। साथ ही ये सभी धाराएं 23 अध्‍याय में बंटी हुई हैं। जिससे हम किसी भी अपराध की सजा इसके अंदर आसानी से जान सकते हैं। इनका विभाजन अपराध के हिसाब से किया गया है। हालांकि, इसके अंदर समय समय पर बदलाव भी होता रहता है। क्‍योंकि समय के साथ अपराध की प्रवृति भी बदलती रहती है। उदाहरण के लिए जब इसे बनाया गया होगा तो शायद ही कल्‍पना की गई होगी कि एक समय में लोगों के साथ Digital Fraud भी होने लगेगा। साइबर क्राइम भी बढ़ने लगेगा। इसलिए इस तरह के गुनाह को इसके अंदर बाद में जोड़ा गया था।

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CRPC क्‍या होती है?

अब आपने जान लिया कि IPC Dharaye kitni hoti Hai इसके बाद आइए हम आपको बताते हैं कि CRPC क्‍या होती है। यह भी IPC और पुलिस के कार्य में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। CRPC की यदि हम Full Form की बात करें तो यह होती है Code of Criminal Procedure इसके अंदर जानकारी दी गई होती है कि पुलिस किसी तरह के अपराध की जांच कैसे करेगी। उसकी प्रक्रिया क्‍या होगी। CRPC का साल 1973 में डॉफ्ट तैयार किया गया था। जबकि साल 1974 में इसे लागू कर दिया गया था। इसे लाने का मुख्‍य मकसद था कि पुलिस किसी भी अपराधी को बेवजह परेशान ना करें। क्‍योंकि कई बार देखा ये गया है कि पुलिस जांच के नाम पर किसी भी अपराधी को बेवजह प्रताडि़त करती है।

CRPC के अंदर बताया गया है कि सबूत इकठ्ठा कैसे किया जाएगा, अपराधी को जमानत कैसे दी जाएगी, जमानत के लिए कौन से कागजात चाहिए होंगे, इसका आवेदन कैसे किया जाएगा, कोर्ट मे वकील का क्‍या काम होगा, जज का क्‍या काम होगा, पुलिस का क्‍या काम होगा, आरोपी को गिरफ्तार कैसे किया जाएगा, उसके साथ जेल में किस तरह का बर्ताव किया जाएगा, उसे कोर्ट में कब और कैसे लाया जाएगा। इस तरह की तमाम चीजें CRPC के अंदर दी गई हैं।

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IPC के अंदर जांच की प्रक्रिया का वर्णन

  • सब से पहले अपराध की जांच के बारे में बताया गया है।
  • इसके बाद संदिग्‍ध लोगों के प्रति कैसा बर्ताव किया जाएगा। इसकी जानकारी दी गई है।
  • अपराध से जुड़ें साक्ष्‍य किस तरह से जुटाए जाएंगे और उनका संग्रह किस तरह से किया जाएगा।
  • अंत में यह किस तथ्‍य पर करार दिया जाएगा कि जो भी व्‍यक्ति दोषी है। वो अपराधी है या नहीं।

IPC में धारा किस तरह से लगाई जाती है?

आगे हम आपको कुछ उदाहरण देने जा रहे हैं जिनकी मदद से आप समझ सकते हैं कि जब कोई इंसान कोई अपराध या गुनाह कर देता है तो उसके ऊपर किस तरह से IPC की धारा लगाई जाती है। साथ ही धारा का चुनाव किस तरह से किया जाता है।

उदाहरण: मान लीजिए आप सड़क पर अपनी गाड़ी लेकर जा रहे हैं और साइड में साइन बोर्ड लगा है कि यहां पर आप 80 KM/H की स्‍पीड से ऊपर गाड़ी नहीं चला सकते हैं लेकिन आप इससे ऊपर ले जाते हैं। अब आपने कानून का एक नियम तोड़ा है। ऐसे में इसकी सजा तो होगी ही। IPC में इसके बारे में जिक्र धारा 279 में किया गया है। जिसमें बताया गया है कि यदि सड़क पर कोई उपेक्षा पूर्ण वाहन चलाता है तो उसके लिए जुर्माना देना होगा। लेकिन यदि वो जुर्माना नहीं भरता है तो उसके लिए छह महीने की सजा का प्रावधान है। पुलिस इसी धारा के तहत आपको इस अपराध में जेल में डाल सकती है।

क्‍यों कई बार पुलिस से बच जाते हैं बड़े अपराधी?

आपने ऊपर जाना कि IPC Dharaye kitni hoti Hai इससे आपके जहन में भी ये सवाल आया होगा कि जब हमारे देश में इतने सारे कानून है तो फिर भी अपराधी कई बार बच कैसे जाते हैं। इसे भी आइए हम आपको एक उदाहरण के माध्‍यम से समझाते हैं।

पहला उदाहरण: मान लीजिए कोई इंसान सूनसान सड़क पर जा रहा है और उसे पांच लोग मिलकर रोकते हैं। डराते धमकाते हैं और फिर उसका मोबाइल, पर्स और गले में पहनी सोने की चेन छीन लेते हैं। इसके बाद अगले दिन अखबार में खबर छपती है कि पांच लोगों ने दिन दहाड़े एक इंसान को लूटा। जिससे पूरे शहर में चर्चा शुरू हो जाती है।

दूसरा उदाहरण: इसके बाद उसी शहर में कुछ दिनों बाद किसी बैंक में रात के समय मे दो नकाब पोश बदमाश युवक बैंक में घुसते हैं और लॉकर तोड़कर तीन करोड़ रूपए लेकर फरार हो जाते हैं। अगले दिन अखबार में खबर छपती है कि दो लोगों ने बैंक में की डकैती। इसके बाद फिर से शहर में लोग काफी दहशत में आ जाते हैं।

IPC में इन दोनों अपराध की परिभाषा

अगर हम इस अपराध को IPC के तहत देखें तो उसके अंदर बताया गया है कि डकैती करने के लिए कम से कम पांच लोग जरूरी होते हैं। साथ ही किसी इंसान इंसान को डरा धमका कर ही डकैती संभव है। यानि सरेराह आदमी का सामान छीनने वाली घटना की परिभाषा IPC में डकैती दी हुई है। जिसे हम लोग आम भाषा में इतना बड़ा अपराध नहीं मान सकते हैं।

जबकि बैंक लूट में कहा गया है कि दो लोग बैंक में जाते हैं और पैसा लेकर भाग जाते हैं। इसके लिए उन्‍होंने ना तो किसी को डराया ना ही बंधक बनाया। इसलिए इसे IPC में चोरी की घटना माना जाएगा। जानकर भले आपको अजीब लगे पर IPC में कानून की परिभाषा कुछ इसी तरह की दी गई है। यानि बैंक में होने वाली घटना बेहद सामान्‍य है।

इस तरह से आप समझ गए होंगे कि इसके अंदर किस अपराधी को ज्‍यादा सजा दी जाएगी और किस अपराधी को कम सजा दी जाएगी। जबकि वास्‍तव में गुनाह एकदम इसके उलट है। इस तरह से आप समझ सकते हैं कि क्‍यों‍ कई बार सबकुछ होते हुए भी गंभीर अपराधी कानून से बचकर निकल जाते हैं।

IPC की प्रमुख धाराएं

आगे हम आपको IPC की प्रमुख धाराओं के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। क्‍योंकि यहां 511 धाराओं के बारे में जानकारी देना संभव नहीं है। इसलिए हम आपको केवल प्रमुख धाराओं के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनके बारे में पलिस के साथ आम आदमी को भी होनी चाहिए।

  • धारा 13 के अंदर किसी तरह का जुआ खेलना या सट्टा लगाना बताया गया है।
  • धारा 141 में कानून के खिलाफ जाकर किसी तरह का जमावड़ा लगाना या पांच से अधिक लोगों का इकठ्ठा होना। इसे आम भाषा में धारा 144 कहा जाता है। जो कि आपात समस मेंं लगाई जाती है। जिसके अंदर इंटरनेट भी बंद किया जा सकता है।
  • धारा 161 के अंदर किसी को रिश्‍वत देना या लेना शामिल किया गया है।
  • धारा 171 में चुनाव में घूस लेना या देना।
  • धारा 186 मेंकिसी व्यक्ति द्वारा सरकारी काम में बाधा पहुंचाने पर उसके ऊपर IPC Section 186 के तहत मुकदमा होगा।
  • धारा 201 के अंदरसबूत मिटाना।
  • धारा 302 के अंदर किसी की हत्या या कत्ल करना।
  • धारा 264 में गलत तौल के बांटों का प्रयोग करने की सजा।
  • धारा 267 में किसी दवाई या औषधि में मिलावट करना।
  • धारा 292 के अंदरकिसी व्यक्ति द्वारा समाज में अश्लीलता फ़ैलाना।
  • धारा 153 A उन लोग पर लगाई जाती है जो धर्म, भाषा, नस्ल के आधार पर लोगो में नफरत फ़ैलाने की कोशिश करते हैं।
  • धारा 372 के अंदर खाने पीने के सामान में मिलावट करना।
  • धारा 292 के अंदर अश्लील पुस्तकों को बाजार में बेचना।
  • धारा 306 में आत्महत्या करना या किसी को उकसाना। क्‍योंकि IPC में आत्‍महत्‍या करना एक अपराध है और इसकी सजा भी दी गई है।
  • धारा 307 मेंअगर कोई यक्ति किसी की हत्या करने के इरादे से उसके चोट पहुँचाता है लेकिन उस व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है तो यह धारा 307 के तहत सजा का प्रावधान है।
  • धारा 362 में किसी व्‍यक्ति का अपहरणकरना।
  • धारा 392 में लूट करने की सजाबताई गई है।
  • धारा 365 मेंजब भी कोई किसी व्यक्ति का अपहरण (kidnap) करता है तो IPC की धारा 365 लागू होती है इसमें सात साल का कारावास और जुर्माने का प्रावधान दिया जाता है।
  • धारा 310 में किसी के साथ ठगी करना।
  • धारा 420 मेंछल या बेईमानी से किसी की सम्पत्ति अर्जित करना।
  • धारा 489 में किसी तरह से नकली नोट बनाना या छापना।
  • धारा 493 में धोखे से किसी के साथ शादी करना।
  • धारा 494 मेंपति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी कर लेना।
  • धारा 496 में किसी लड़का या लड़की की बिना इच्‍छा के जबरदस्‍ती विवाह करना।

Conclusion

आपने हमारे इस लेख में जाना कि पुलिस की IPC Dharaye kitni hoti Hai यदि अब आप जान चुके हैं कि IPC Dharaye kitni hoti Hai तो हमारी इस पोस्‍ट को अपने दोस्‍तों तक भी जरूर शेयर करें। ताकि वो भी जान सकें कि पुलिस की धारा कितनी होती है। यदि आपका कोई सवाल या सुझाव है तो हमें नीचे कमेंट भी करें।

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उम्र में युवा और तजुर्बे में वरिष्ठ रोहित यादव हरियाणा के रहने वाले हैं। पत्रकारिता में डिग्री रखने के साथ इन्होंने अपनी सेवाएं कई मीडिया संस्थानों को दी हैं। फिलहाल ये पिछले लंबे समय से अपनी सेवाएं 'All in Hindi' को दे रहे हैं।

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