RTI kya Hai | सूचना का अधिकार – आरटीआई क्या है?, RTI online apply कैसे करें?

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ऑनलाइन आरटीआई कैसे लगाएं?

RTI kya Hai; लोकतंत्र में जनता ही सबसे सर्वोपरि होती है। सरकार किसी की भी हो और कितने भी बहुमत से हो पर जनता को उसे हिसाब किताब देना ही होता है। इसके लिए जनता के पास सबसे बड़ा हथियार होता है आरटीआई जिसे हम सूचना के अधिकार कानून के नाम से भी जानते हैं।

इस कानून की मदद से कोई भी नागरिक सरकार से कोई भी जानकारी मांग सकता है। साथ ही चाहे तो वो उससे जुड़ें दस्‍तावेज भी माग सकता है। लेकिन यदि आप अभी तक नहीं जानते हैं कि सूचना का अधिकार क्‍या होता है? इसका प्रयोग किस तरह से किया जाता है? RTI online apply कैसे करें? तो हमारे इस लेख को अंत तक पढि़ए। अपने इस लेख में हम आपको बताएंगे कि RTI online apply कैसे करें?

आरटीआई क्‍या होता है?

आरटीआई कैसे लगाई जाती है इस बारे में हम आपको जानकारी दें। इससे पहले आइए एक बार हम आपको बताते हैं कि आरटीआई होता क्‍या है। कई बार लोग मानवाधिकार आयोग को सूचना के अधिकार के साथ जोड़ देते है परंतु ऐसा नही है।

दरअसल, आरटीआई एक सूचना का अधिकार कानून है। जिसे साल 2005 में लाया गया था। इसका मकसद था कि सरकार के काम में पारदर्शिता लाई जा सके। क्‍योंकि इस कानून के आ जाने से कोई भी नागरिक किसी भी सरकारी विभाग से कोई भी सूचना मांग सकता है। वो भी बिना कोई कारण बताएं।

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ऑनलाइन आरटीआई कैसे लगाएं?

आरटीआई कानून जब बना था तो इसे केवल ऑफलाइन ही लगाया जा सकता था। क्‍योंकि उस दौरान इंटरनेट का चलन इतना ज्‍यादा नहीं था। लेकिन समय की मांग को देखते हुए इसे अब आप ऑनलाइन भी RTI लगा सकते हैं। ऑनलाइन आरटीआई लगाने के लिए सबसे पहले आपको संबधित वेबसाइट पर जाना होगा। जहां सबसे पहले कुछ अपने से जुड़ी जूरूरी जानकारी देनी होगी। जिसके बाद आपको विभाग का चुनाव करना होगा जहां आप आरटीआई लगाना चाहते हैं।

इसके बाद आप अपने सभी सवाल क्रम वार लिख कर आगे भेज सकते हैं। आरटीआई लिखने का तरीका भी हम आपको आगे इसकी पोस्‍ट में बताने वाले हैं। ऑनलाइन आरटीआई के लिए केंद्र की सरकार की एक अलग वेबसाइट है जहां से आप सभी विभागों से सूचना मांग सकते हैं। जबकि किसी राज्‍य में आरटीआई के‍ लिए अलग अगल वेबसाइट बनी है। जिसका लिंक हम आपको नीचे देने जा रहे हैं।

Centre Gov Online RTI Link- Click Here

UP Gov Online RTI Link- Click Here

Punjab Gov Online RTI Link- Click Here

Himachal Gov Online RTI Link- Click Here

Bihar Gov Online  RTI Link- Click Here

MP Gov Online RTI Link- Click Here

ऑफलाइन आरटीआई कैसे लगाएं?

यदि आप ऑनलाइन आरटीआई नहीं लगाना चाहते हैं तो आप इसे ऑफलाइन भी लगा सकते हैं। इसके लिए आपको अपने सवाल एक कागज पर लिखकर उसे डाक के जरिए या फीस का भुगतान करके आप स्‍वंय भी उस विभाग में देकर आ सकते हैं। जिस विभाग में आप आरटीआई लगाना चाहते हैं। लेकिन ध्‍यान ये रखें कि आपको हर तरह से दी गई आरटीआई का जवाब डाक के जरिए ही प्राप्‍त होगा। इसलिए बेहतर होगा कि आप डाक का प्रयोग करें।

rti kya hai

आरटीआई कैसे लिखें?

आइए अब हम आपको आरटीआई लिखने का तरीका बताते हैं। क्‍योंकि आरटीआई लगाने में आपके सवाल का जवाब विभाग तभी देने में सक्षम होगा जब आपके सवाल सीधे और स्‍पष्‍ट होंगे।

  • आरटीआई में सबसे पहले आप इन लाइनों को सबसे ऊपर लिख दें-

सूचना का अधिकार 2005 की धारा 6 (1) और 6(3) के अंतर्गत आवेदन।

सेवा में,

अधिकारी का पद / जनसूचना अधिकारी

विभाग का नाम………….

विभाग का पता………….

विषय – सूचना अधिकार के तहत आवेदन (RTI) Act 2005 के अंतर्गत ……………… से संबधित सूचनाएं।

  • इसके बाद आप 1, 2, 3 नंबर डालते हुए अपने सभी सवाल लिखें। आप एक ही आरटीआई में एक साथ कई सवाल भी पूछ सकते हैं। लेकिन वो सभी नंबर के हिसाब से लिखे गए हों।
  • सवाल लिखने की भाषा इस तरह रखें- जानकारी प्रदान की जाए कि फलां योजना के लिए कितना बजट आया था। साथ ही उसके खर्च का विवरण भी प्रस्‍तुत किया जाए।

सभी सवाल लिखने के बाद अंत में इस लाइन को लिखें-

यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/कार्यालय से सम्बंधित नहीं हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6 (3) का संज्ञान लेते हुए मेरा आवेदन सम्बंधित लोकसूचना अधिकारी को पांच दिनों के समयावधि के अन्तर्गत हस्तान्तरित करें। साथ ही अधिनियम के प्रावधानों के तहत सूचना उपलब्ध कराते समय प्रथम अपील अधिकारी का नाम व पता अवश्य बतायें।

  • अंत में इस लाइन को लिखने का मतलब ये हुआ कि यदि संबधित विभाग के पास आपकी मांगी गई जानकारी नहीं होगी तो आपकी आरटीआई उससे जुड़े विभाग में पहुंचा दी जाएगी।
  • इसके बाद आप दिनांक लिखते हुए अंत में अपने हस्‍ताक्षर कर दें।

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आरटीआई लिखने के दौरान कुछ ध्‍यान रखने योग्य बातें

  • आरटीआई आप हिंदी या अंग्रेजी किसी भी भाषा में लिख सकते हैं। बस जिस भी भाषा में लिखें वो पूरी तरह से साफ और सही हो। यहां एक बात और ध्‍यान देने वाली है कि आप जिस भाषा में आरटीआई लिखेंगे संभावना है कि आपका जवाब भी आगे से उसी भाषा में दिया जाए।
  • कभी भी एक ही आरटीआई लिखने में दो भाषाओं का प्रयोग ना करें। केवल हिंदी में कुछ कठिन शब्‍दों को ( ) में अंग्रेजी में लिख सकते हैं।
  • यदि आप डाक के जरिए आरटीआई भेज रहे हैं। तो हमेशा स्‍पीड पोस्‍ट ही करें। इससे आपके पास सबूत भी रहेगा कि आपने इस तारीख को ही आरटीआई लगाई थी।
  • जब आप डाक के ऊपर पता लिखें तो जाने और आने का एकदम सही लिखें। साथ ही अपना फोन नंबर भी जरूर दे दें। क्‍योंकि उसका जवाब डाक के जरिए ही आएगा।

आरटीआई से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम

  • आरटीआई के मांगी गई कोई भी सूचना आमतौर पर 30 दिन के अंदर देनी होती है। लेकिन कई मामलों में इसके अंदर 35 से 40 दिन का भी प्रावधान रखा गया है।
  • यदि किसी इंसान की जीवन या मृत्‍यु से जुड़ा कोई मामला है तो आपको उस आरटीआई का जवाब महज 48 घंटे के अंदर भी दिया जा सकता है। लेकिन इस बात को आपको आरटीआई लगाने के दौरान बताना होगा।
  • देश की सुरक्षा और संप्रभुता और अंखडता से जुड़े मामलों में आरटीआई नहीं लगा सकते हैं। यदि आप लगाते भी हैं तो जवाब देने से इंकार कर दिया जाएगा।
  • आरटीआई लगाने के दौरान आप संबधित जानकारी, उससे जुड़े दस्‍तावेज और यदि आप चाहें तो उस विभाग में खुद जाकर भी फाइलों को चेक कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आपको मामूली सी राशि और चुकानी होगी।
  • आरटीआई की फीस केवल दस रूपए रखी गई है। जबकि यदि आप गरीबी रेखा से नीचे के परिवार में आते हैं तो आपके लिए वो भी माफ है। आपको बस दस्‍तावेज की प्रति के हिसाब से संभवत दो रुपए चुकाने होंगे।
  • आरटीआई कानून में एक खास प्रावधान किया गया है कि जब भी आप किसी विभाग में आरटीआई लगाते हैं तो आपसे कोई ये सवाल नहीं पूछ सकता है कि आप आरटीआई क्‍यों‍ लगा रहे हैं। यदि कोई अधिकारी ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है।
  • आरटीआई के नियम के मुताबिक यदि संबधित अधिकारी तय समय के अंदर सूचना नहीं दे पाता है, तो उसके ऊपर प्रतिदन के हिसाब से 250 रुपए और अधिकतम 25 हजार रूपए जुर्माना लगाया जा सकता है। जो कि उसके वेतन से काटा जाएगा।
  • यदि आपको तय समय में जवाब नहीं दिया जाता है, तो आप पहली अपील और फिर दूसरी अपील और अंत में कोर्ट भी जा सकते हैं।
  • आरटीआई के जरिए आप केवल वही सूचना मांगे जो कि आपके लिए जरूरी हो। इसका दुरूपयोग कतई ना करें। यह आपको महंगा भी पड़ सकता है।

आरटीआई कानून से जुड़ी कुछ धाराएं

  • धारा 6 (1) के अंदर बताया गया है किे आपको आरटीआई लगाने के लिए आवेदन किस प्रकार से लिखना है।
  • धारा 6 (3) में बताया गया है कि यदि आपका आवेदन गलत विभाग में चला जाता है, तो उसे पांच दिन के अंदर दोबारा से सही विभाग में भेज देना जरूरी है।
  • धारा 7 (5) में बताया गया है कि किसी भी विभाग में आरटीआई लगाने के लिए बीपीएल परिवारों को किसी तरह का शुल्‍क नहीं देना होगा।
  • धारा 7 (6) इस धारा के अनुसार बताया गया है कि अगर आरटीआई का जवाब 30 दिन में नहीं आता है तो सूचना नि:शुल्क में दी जाएगी।
  • धारा 18 में बताया गया है कि यदि कोई आधिकारी सूचना देने से मना करता है या सूचना नहीं देता है तो उसकी शिकायत सूचना अधिकारी से की जा सकती है।
  • धारा 8 के अंदर कुछ ऐसी चीजें रखी गई हैं जिनकी सूचना आप आरटीआई के माध्‍यम से नहीं ले सकते हैं। क्‍योंकि उनके बाहर आ जाने से देश को किसी तरह का खतरा हो सकता है।
  • धारा 19 (1) में बताया गया है कि यदि आपको आरटीआई का जवाब 30 दिनों के अदंर नहीं दिया जाता है, तो उसके खिलाफ आप प्रथम अपील लगा सकते हैं।
  • धारा 19 (3) में बताया गया है कि यदि प्रथम अपील लगाने के बाद भी आपको किसी तरह का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो आप 90 दिनों के अंदर दूसरी अपील भी लगा सकते हैं।

आरटीआई के फायदे

  • आरटीआई एक ऐसा कानून है जिसकी मांग लंबे समय से हो रही थी। इस कानून की मदद से आम नागरिकों के हाथों में वो ताकत आ गई। जिसकी मदद से वो सरकार से सवाल करने की क्षमता रखते हैं।
  • आरटीआई के जरिए आप किसी भी विभाग से सूचना मांग सकते हैं। खास बात ये है कि इसके अंदर हर विभाग शामिल है। जिससे आप बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी सूचना तक मांग सकते हैं।
  • इसकी फीस और लगाने का तरीका इतना सहज और सरल रखा गया है कि इसे देश का एक आम आदमी भी लगा सकता है।
  • इस कानून के आ जाने से सरकारी कामों में काफी तेजी देखने को मिली है। जो कि पहले काफी कम गति से होते थे। साथ ही उनका रिकार्ड भी पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाने लगा है।
  • आरटीआई के माध्‍यम से कई बार इतने बड़े खुलासे हुए हैं। जिनकी हम कल्‍पना तक नहीं कर सकते हैं। लेकिन आरटीआई ने जानकारी और सबूत बाहर लाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • खास बात ये है कि यदि आपको आरटीआई के माध्‍यम से कोई जानकारी मिली है तो आप उसका प्रयोग किसी सरकारी विभाग में सबूत के तौर पर या अदालत में इसे साक्ष्‍य के रूप में कर सकते हैं। यह पूरी तरह से मान्‍य होगी।

आरटीआई के नुकसान

  • आरटीआई की वजह से कई बार सरकारी विभागों के अधिकारियों से बेवजह की जानकारी मांग कर जानबूझ कर उन्‍हें परेशान किया जाता है। साथ ही यह एक कानून है इसलिए वो जानकारी देने के लिए बाध्‍य होते हैं।
  • आरटीआई कानून जब से आया है तब से कई आरटीआई कार्यकर्ता की हत्‍या हो चुकी है। ऐसा इसलिए किया गया। क्‍योंकि वो लगातार आरटीआई का प्रयोग कर घपले और घोटाले सामने ला रहे थे।
  • कई बार देखा गया है कि जब कोई आम आदमी आरटीआई लगाता है तो उसे जिले की पुलिस या प्रशासन परेशान करने लगता है। बदले में उस पर बेवजह के केस और बिना मलतब के उसे बार बार विभागों में बुलाया जाता है।
  • आरटीआई कानून का आज भी सरकार और अधिकारी इतने व्‍यापक स्‍तर पर प्रचार प्रसार नहीं करते हैं। जिसकी वजह से इसे लगाने का तरीका हर काई नहीं जानता है। जिससे इसका पूरा प्रयोग नहीं हो पाता है।

Conclusion

आशा है कि अब आप समझ गए होंगे कि RTI kya Hai, RTI online apply कैसे करें? यदि आप ये सब जान चुके हैं तो इस लेख को अपने दोस्‍तों तक भी शेयर अवश्‍य करें। साथ ही आपका कोई सवाल या सुझाव है तो नीचे कमेंट करें।

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उम्र में युवा और तजुर्बे में वरिष्ठ रोहित यादव हरियाणा के रहने वाले हैं। पत्रकारिता में डिग्री रखने के साथ इन्होंने अपनी सेवाएं कई मीडिया संस्थानों को दी हैं। फिलहाल ये पिछले लंबे समय से अपनी सेवाएं 'All in Hindi' को दे रहे हैं।

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