जल प्रदूषण को रोकने के उपाय | जल प्रदूषण के कारण और प्रभाव

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जल प्रदूषण को रोकने के उपाय कारण और प्रभाव

जल प्रदूषण को रोकने के उपाय- भारत में प्रदूषण हाल के कुछ वर्षो में एक गंभीर समस्या के तौर पर उभरकर हमारे सामने आया है। जिसमें Water pollution आज के दौर में हमारे सामने सबसे विकराल समस्‍या है। क्‍योंकि जल हमारे पीने के काम आता है। ऐसे में यदि हम जल प्रदूषण को रोकने के उपाय पर मंथन नहीं करेंगे तो आने वाले सालों में हम सभी को उससे दोचार होना पड़ेगा।

क्‍योंकि बिना पानी पिए हम लोग एक दिन भी नहीं गुजार सकते। इसलिए आइए आज हम अपनी इस पोस्‍ट में आपको जल प्रदूषण के कारण के बारे में बताते हैं और जल प्रदूषण को रोकने के उपाय के बारे में भी आपको जानकारी देते हैं। ताकि हम लोग Water pollution के प्रति जागरूक हो सकें और लगातार बढ़ते Water pollution को कम करने में अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दे सकें।

जल प्रदूषण क्‍या है

जल प्रदूषण हम उसे कहते हैं जब हमारे पीने के स्‍वच्‍छ जल में किसी तरह का हानिकारक पदार्थ मिलाकर उसे प्रदूषित कर दिया जाता है। ये हानिकारक पदार्थ कई प्रकार के होते हैं। जो कि जल को प्रदूषित करने का काम करते हैं। बहुत बार हम इन्‍हें जानबूझ कर साफ पानी में मिला देते हैं,  तो बहुत बार ये हमसे किसी अनजाने में मिल जाते हैं। इसी प्रदूषित हुए जल को हम जल प्रदूषण कहते हैं।

जल प्रदूषण के कारण | Causes of water pollution in hindi

  • Water pollution के प्रमुख कारण तो हमारे देश में लगातार बढ़ते उद्योग धंधे हैं। क्‍योंकि ये जिस भी जगह ये स्‍थापित किए जाते हैं तो इनसे निकलने वाले गंदे पानी की निकासी की कोई उचित व्‍यवस्‍था नहीं होती है। इसलिए इसे आसपास के किसी गंदे नाले में बहा दिया जाता है या नहरों में छोड़ दिया जाता है। जिससे वो जल प्रदूषित हो जाता है और जल प्रदूषण के कारण लोगों के बीमार होने का औसत बढ़ जाता है।
  • इसके अलावा देश में लगातार बढ़ती जनसंख्‍या है। क्‍योंकि हमारे देश में अब भी बहुत से ऐसे इलाके हैं जहां लोग खुले में शौच करने जाते हैं। इससे भूमिगत जल प्रदूषित होता है। जो कि नल कूपों के माध्‍यम से हमारे घरों में सीधे आता है। जो कि सही मायने में फिर पीने के काबिल नहीं रह जाता है।
  • गांव के लोग नहर, तालाब आदि में नहाने और कपड़े धोने जाते हैं, जिससे ये पानी प्रदूषित हो जाता है और जब आगे इसको किसी काम के लिए प्रयोग किया जाता है तो तो ये पूरी तरह से उपयोग करने के काबिल नहीं रहता है। क्‍योंकि इसमें साबुन के अंदर मिले हुए कैमिकल भी घुल जाते हैं।
  • गांवों में अब भी बहुत से लोग जब किसी जानवर की मृत्‍यु हो जाती है तो उसे धरती में दबाने की बजाय नहरों आदि में बहा देते हैं। जिससे उन्हें मेहनत कम करनी पड़ती है। लेकिन उन्‍हें नहीं पता होता है कि ये पानी को इतना खराब कर देता है कि इससे ये पानी आगे चलकर किसी काम का नहीं रहता है। साथ ही कई बार इन जानवरों के सड़ने के कारण इस पानी से बदबू तक आने लगती है।
  • इसके साथ हमारे खेतों में जो किसान भाई अधिक उपज लेने के लालच में खेतों में रासायनिक कैमिकल का छिड़काव करते हैं। उनसे भी जल प्रदूषण काफी मात्रा में बढ़ता है। क्‍योंकि वो कैमिकल अंत में जमीन के अंदर चला जाता है, जिससे हमारा भूमिगत जल प्रदूषित हो जाता है।

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जल प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव

जल प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव भी प्रतिकूल होता है, चलिए अब हम जानते है जल प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव किस प्रकार पड़ता है।

  • Water pollution के कारण हमारे शरीर को अनेकों प्रकार की बीमारियां जकड़ लेती हैं। जैसे कि पोलियो, मियादी बुखार, हैजा, डायरिया क्षयरोग, पेचिस आदि। इन गंभीर बीमारियों से ग्रस्‍त होने के बाद इनके इलाज पर भी हमें काफी मात्रा में पैसा खर्च करना पड़ता है। जो कि जल प्रदूषण की देन है।
  • दूषित जल से यदि हम खेतों में सिंचाई करते हैं तो हमारी फसल भी अच्‍छी उपज नहीं दे पाती है। साथ ही हमारे खेत से होने वाले अनाज को जो कोई भी खाता है, उसे भी बीमारियों का डर बना रहता है। साथ ही उसकी सेहत पर भी इसका काफी बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • पानी में रहने वाले जलीय जीव जो कि पानी के अंदर ही सांस लेते हैं। ऐसे में यदि वो जल प्रदूषित होगा तो उनके शरीर पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसी प्रभाव के चलते बहुत से जलीय जीव अब पृथ्‍वी पर से विलुप्‍त हो चुके हैं। साथ ही इसका सबसे ज्‍यादा बुरा प्रभाव मछलियों पर पड़ता है।

जल प्रदूषण को रोकने के उपाय

जल प्रदूषण की दर को कम करने के लिए हमें जल प्रदूषण को रोकने के उपाय के बारे में अवश्य पता होना चाहिए तभी हम दैनिक जीवन में Water pollution की बढ़ती दर को कम कर सकते है। तो चलिए जानते है jal pradushan rokne ke upay क्या है।

  • कारखानों और उद्योग धंधों से निकलने वाले कचरे को हमेशा निष्‍पादन की उचित व्‍यवस्‍था के साथ ही उन्‍हें बाहर निकालना चाहिए। ताकि ये कचरा जहां भी जाए किसी तरह का प्रदूषण फैलाने का काम ना करे। यदि संभव हो ऐेसे कारखानों को हमेशा शहर से बाहर लगाया जाए ताकि आमजन को इनसे किसी तरह की परेशानी ना हो।
  • साथ ही स‍रकार को अपने स्‍तर पर कोशिश करके जल प्रदूषण को बढ़ाने वाले लोगों को दंडित करने के लिए कोई विशेष कानून बनाना चाहिए, ताकि जो भी जल प्रदूषण को बढ़ाने का काम करे उसे सजा या जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए। ताकि लोगों के मन में भय उत्पन्‍न हो सके।
  • जिन जगहों पर ऐसी संभावना रहती है कि यहां के लोग जल के अंदर किसी तरह का प्रदूषण फैला सकते हैं, वहां सरकार को अपने स्‍तर पर पानी के अंदर ब्‍लीचिंग पाउडर आदि का छिड़काव करवाना चाहिए। ताकि जब वो पानी आगे जाए तो उसमें किसी तरह के जीवाणु ना रहें जिससे लोगों को किसी तरह का उस पानी के सेवन से नुकसान ना उठाना पड़े।
  • सरकार को खेतों में प्रयोग होने वाले कीटनाशक पर प्रतिबंध लगाना चाहिए या इसकी कोई सीमा निर्धारित करनी चाहिए। जिससे भूमिगत जल को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
  • हम अपने घरों में जो भी पानी पीने के लिए उपयोग में लेते हैं, उसे हमें या तो फिल्‍टर करके पीना चाहिए या उबाल कर पीना चाहिए। ताक‍ि हानिकारक पदार्थ उसमें से नष्‍ट हो जाएं।
  • इसके अलावा समाज और आमजन को जल प्रदूषण के प्रति सरकार और समाजसेवी लोगों को जागरूक करना चाहिए। उन लोगों को बताना चाहिए कि आपकी छोटी सी ये लापरवाही कितनी बड़ी समस्‍या को जन्‍म देने का काम करती है। ताकि लोग अपने स्‍तर पर जल प्रदूषण को रोकने के‍ लिए आगे आएं।
  • अन्‍तराष्‍ट्रीय स्‍तर पर जो समुद्रों में तमाम देशों के अंदर परीक्षण आदि होते है। उन पर दुनिया के तमाम संगठनों को बैठक करनी चाहिए। ताकि जो लगातार समुद्री प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, उसे भी रोका जा सके अन्‍यथा भविष्‍य में ये भी हमारे लिए एक गंभीर समस्‍या के रूप में उभरकर सामने आएगा।

अंतिम शब्द

जल प्रदूषण को रोकने के उपाय और कारण के साथ साथ आज आपने जाना कि जल प्रदूषण का मानव जीवन पर प्रभाव किस प्रकार पड़ता है। प्रदुषण एक गंभीर समस्या है हर वर्ष कई शहरों में प्रदुषण की समस्या की वजह से लोगों के रहन सहन और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसे कम करने में अपना योगदान दें ताकि हमारी आने वाली पीढियां इस धरती पर आसानी से सांस ले सके।

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नमस्कार दोस्तों, मैं रवि "आल इन हिन्दी" का Founder हूँ. मैं एक Economics Graduate हूँ। कहते है ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता कुछ इसी सोच के साथ मै अपना सारा ज्ञान "आल इन हिन्दी" द्वारा आपके साथ बाँट रहा हूँ। और कोशिश कर रहा हूँ कि आपको भी इससे सही और सटीक ज्ञान प्राप्त हो सकें।

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