Dwitiya shreni ke rangon ki sankhya kitni hoti hai | रंगों के प्रकार, द्वितीय श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है?

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Dwitiya shreni ke rangon ki sankhya kitni hoti hai | द्वितीय श्रेणी के रंगों की संख्या कितनी होती है?

क्‍या आप जानते हैं कि रंगों के भी कई प्रकार होते हैं? उन्‍हें भी कई श्रेणी में विभाजित किया गया है? ताकि उन्‍हें समझने में आसानी रहे। आज हम जानेंगे कि प्रथम , Dwitiya shreni ke rangon ki sankhya kitni hoti hai, इसके साथ तृतीय रंगों के बारे में भी।

रंगों का हम सभी के जीवन में महत्‍वपूर्ण स्‍थान होता है। चाहे घर सजाने के बात हो या कपड़े खरीदने की बात हो, हम सभी इस दौरान रंगों का विशेष ध्‍यान रखते हैं। ताकि रंगों की खूबसूरती में कोई कसर ना रहे।

लेकिन यदि आप अभी तक रंगों के विभाजन का तरीका नहीं जानते हैं। उनकी किस श्रेणी में कौन सा रंग शामिल होता है। इस बारे में अभी तक नहीं जानते हैं। तो हमारे इस लेख को आप अंत तक पढिए। अपने इस लेख में हम आपको रंगों से जुड़ी सारी जानकारी देंगे। जिसके बाद आप रंगों का महत्‍व भी समझ सकते हैं। तो चलिए जानते है कि द्वितीय श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है?

रंग क्‍या होते हैं?

Dwitiya shreni ke rangon ki sankhya kitni hoti hai यह जानने से पहले चलिए जानते है कि रंग क्या होते है। और जीवन में इसका क्या महत्त्व है।

रंगों की श्रेणी के बारे में जानकारी दें। इससे पहले आइए आपको रंगों का एक बार परिचय दे देते हें। हम रंग उसे कहते हैं जो भी रंगीन हो उसके ऊपर जो भी रंग लगा दिखाई दे रहा है। वही उसका रंग होता है। ये रंग कुल मिलाकर 12 तरह के होते हैं। लेकिन यदि हम इनमें और बारीकी से देखें तो इनकी संख्‍या और भी ज्‍यादा हो सकती है।

किसी भी चीज के ऊपर रंग दो तरह के होते हैं। पहला स्‍थाई और दूसरा अस्‍थाई रंग। इन रंगों की खास बात ये होती है कि आज के समय में पृथ्‍वी पर जो भी वस्‍तु है उसका कोई ना कोई रंग और आकार जरूर है। लेकिन पानी का रंग इसमें एक अपवाद है। क्‍योंकि अभी तक ये तय नहीं हुआ है आखिर पानी का रंग कौन सा होता है। इस तरह से आप चाहे तो इसी समय अपने आसपास मौजूद चीजों के रंग की पहचान कर सकते हैं।

रंगों के विभिन्‍न प्रकार | Dwitiya shreni ke rangon ki sankhya kitni hoti hai

आइए अब हम आपको रंगों की श्रेणी या प्रकार के बारे में जानकारी देते हैं। साथ ही साथ ये भी जानेंगे कि द्वितीय श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है। वैसे तो इन्‍हें कई श्रेणी में विभाजित किया गया है। लेकिन प्रमुख तौर पर हम लोग इनकी तीन श्रेणियों के बारे में ही बात करते हैं। लेकिन यहां हम आपको रंगों की सभी श्रेणियों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।

प्राथमिक श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है?

द्वितीय श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है यह जानने से पहले चलिए जाने कि प्राथमिक श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है।

प्राथमिक श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है

प्राथमिक रंग उन्‍हें कहा जाता है, जो कि बिना किसी दूसरे रंग के सहयोग से बनते हैं। बाल्कि दूसरे रंगों को बनने में इनकी मदद लेनी पड़ती है। इन रंगों के अंदर कुल तीन रंग शामिल होते हैं। जिनमें लाल, पीला और नीला रंग शामिल होता है। जो कि प्राथमिक रंग कहलाता है। इनकी मदद से कई दूसरे रंग का भी निर्माण होता है।

द्वितीय श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है? | Dwitiya shreni ke rangon ki sankhya kitni hoti hai

द्वितीय श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है

जब किन्‍हीं दो ऐसे रंगों को मिलाया जाता है इसके बाद उनसे मिलकर कोई तीसरा रंग बनकर हमारे सामने आता है, तो इन्‍हें हम दूसरी श्रेणी के रंग कहते हैं। इनमें नारंगी, बैगनी और हरा रंग शामिल होता है। जो कि दूसरी श्रेणी के रंग में आता है। आगे हम आपको बताते हैं कि किस रंग को मिलाकर कौनसा रंग बनाया जा सकता है।

पीला + लाल = नारंगी रंग

लाल + नीला = बैंगनी रंग

नीला + पीला = हरा रंग

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तृतीयक श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है?

दूसरी श्रेणी के रंगों को यदि मिलाकर कोई तीसरा रंग बनता है तो हम उसे तृतीयक श्रेणी का रंग कहते हैं। इन रंगों के कोई नाम नहीं है। क्‍योंकि ज्‍यादतर सभी रंग इस श्रेणी में आते हैं। उनमें कुछ गहरे होते हैं। कुछ हल्‍के। इसलिए आप किसी भी रंग को बनाना चाहे तो दूसरी श्रेणी के रंग को मिलाकर बना सकते हैं। साथ ही रंगों में सबसे ज्‍यादा इनका ही प्रयोग होता है। आगे आपको बताते हैं कि प्रमुख तौर पर किन रंगों को मिलकर नया रंग बनाया जाता है।

नारंगी + बैगनी = तृतीयक रंग

बैगनी + हरा = तृतीयक रंग

हरा + नारंगी = तृतीयक रंग

विरोधी रंग

विरोधी रंग ऊपर बताए गए सभी रंगों से अलग होता है। इनमें दो ऐेसे रंग को शामिल किया जाता है। जो कि एक दूसरे के विरीत होते हैं। सजावट के दौरान इनका प्रयोग एक साथ कम ही किया जाता है। जैसे कि लाल का विरोधी रंग हरा होता है। काले का विरोधी रंग सफेद होता है। नीला और बैगनी का विरोधी रंग पीला रंग होता है। अपने जीवन में भी रंगों के प्रयोग के दौरान हम इसका विशेष ध्‍यान रखते हैं।

अवर्णीय रंग

श्‍याम और श्‍वेत को अवर्णीय रंग के तौर पर भी जाना जाता है। जैसे कि यदि कहीं भी साज सज्‍जा हो रही हो तो अवर्णीय रंग एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। इन्‍हें ही अवर्णीय रंग कहा जाता है।

उष्‍ण एंव शीतल रंग

उष्‍ण यानि कि बहुत तेज रंग जो कि आंखों को देखने में अच्‍छा ना लगे जिनसे आंखें हमेशा दूर भागना चाहें। जबकि शीतल यानि एक अच्‍छा रंग जो कि आंखों को बहुत आराम दे। आंखें इससे हटना ही ना चाहें। इन दोनों ही तरह ही रंगों की एक अलग श्रेणी है। साथ ही ये दोनों रंग कभी एक साथ प्रयोग नहीं किए जा सकते हैं। क्‍योंकि इससे अलगाव की भावना देखने में प्रतीत होगी। आइए अब आपको उष्‍ण और शीतल रंगों के नाम बताते हैं।

उष्‍ण रंग- लाल, पीला, नारंगी और इनसे मिलकर बनने वाले सभी रंग उष्‍ण स्‍वभाव के होते हैं।

शाीतल रंग- नीला, हरा व इनके संयोग से बने सभी रंग शीतल रंग की श्रेणी में आते हैं।

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उदासीन रंग

रंगों की सबसे अलग श्रेणी है। इसके सफेद काला व इससे मिलकर बने सभी रंगों को रखा जाता है। इनकी खास बात ये होती है इनका अकेले प्रयोग बेहद ही कम होता है। क्‍योंकि ये अकेले कभी भी आकर्षक नहीं लगते हैं। साथ ही इन्‍हें देखने से इंसान के अंदर उदासीनता की भावना आ जाती है। जो कि आलस्‍य को जन्‍म देती है।

रंगों की विशेषताएं और उनका महत्‍व

लाल रंग- यह रंग सबसे दूर से देखा जा सकता है साथ ही कभी भी इसका रंग परिवर्तित नहीं होता है। इसीलिए इसका प्रयेाग लाल बत्‍ती के अंदर होता है। ताकि लोग दूर से देख सकें। जबकि दूसरी तरफ लाल रंग अक्रामक और खतरे का प्रतीक होता है। सामान्‍य तौर पर इसका प्रयोग सबसे कम होता है।

पीला रंग- यह रंग एक सुन्‍दर प्रकार का होता है। इसके अंदर इंसान को आराम देने की शक्ति होती है। यह रंग इंसान को ऊर्जावान बनाता है। साथ ही इंसान को मानसिक तौर पर शांत करता है। यह रंग शुभ कार्य के अंदर सबसे ज्‍यादा प्रयोग होता है। इसीलिए विवाह शादी के दौरान सबसे ज्‍यादा पीले रंग से सजावट की जाती है।

नीला रंग- नीला रंग शांति का प्रतीक होता है। इसके अंदर शीतलता, एकाग्रता,  आशा, आनंद, ईमानदारी प्रदान करने की क्षमता होती है। इसलिए कई बार लोग इस रंग को घरों के कमरों की दीवारे पर भी करवाते हैं ताकि उनका मन हमेशा पसन्‍न रहे।

हरा रंग– यह रंग ताजगी का प्रतीक होता है। इसे देखकर इंसान को प्रकृति का आभास होता है। जिसकी वजह से इंसान के अंदर ताजगी और आंनद का संचार होता है। हर रंग इंसान की आंखो को भी आराम देता है। जिससे लोग इसे पसंद करते हैं।

नीला रंग- यह रंग वीरता का प्रतीक होता है। इस रंग के प्रयोग से इंसान को सम्‍मान और रहस्‍य के साथ सुख समृधि की भावना जागृत होती है। जिससे काफी लोग इसे कपड़ों में प्रयोग करते हैं।

बैगनी रंग- यह रंग राजस्‍वी वैभव का प्रतीक होता है। इस रंग के जरिए श्रेष्‍ठता और नाटकीयता का भाव जागृत होता है। इन कामों के दौरान बैगनी रंग का प्रयोग होता है।

नारंगी रंग- नांरगी रंग अध्‍यात्‍मक का प्रतीक होता है। यह अत्‍याधिक क्रियाशील रंग होता है। इसे देखकर किसी भी व्‍यक्ति के अंदर काम करने की भावना उत्‍पन्‍न होती है। साथ ही ध‍ार्मिक कामों के दौरान इनका प्रयोग होता है।

सफेद रंग- यह सबसे शुद्ध रंग होता है। इसे हम जब भी कोई पवित्र काम करते हैं तो इसका प्रयोग करते हैं। इस रंग की खास बात ये है कि यह प्रकाश युक्‍त हल्का और कोमल रंग होता है। साथ ही इस रंग के फूल भी बेदद मधुर प्रतीत हो रहे होते हैं। इस रंग के कपड़े लोग गर्मी में सबसे ज्‍यादा पहनना पसंद करते हैं।

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काला रंग- यह रंग भी एक शुद्ध रंग होता है। इसके अंदर भय, शोक, अवसाद, अंधकार और विश्‍वासघात का प्रतीक होता है। जो कि एक तरह से नकारात्‍मक रंगों की श्रेणी में आता है। इसका प्रयोग कभी भी अच्‍छे कामों के लिए नहीं किया जाता है। साथ ही एक ऐेसा रंग होता है। जो कि प्रकाश को अवशोषित कर लेने के चलते लोग इस रंग के कपड़े गर्मी में नहीं पहनते हैं।

Conclusion

आज आपने प्राथमिक, द्वितीय श्रेणी में रंगों की संख्या कितनी होती है, इसके साथ साथ तृतीयक श्रेणी में रंगों की संख्या के बारे में जाना। आशा है अब आप जान चुके होंगे कि Dwitiya shreni ke rangon ki sankhya kitni hoti hai.

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उम्र में युवा और तजुर्बे में वरिष्ठ रोहित यादव हरियाणा के रहने वाले हैं। पत्रकारिता में डिग्री रखने के साथ इन्होंने अपनी सेवाएं कई मीडिया संस्थानों को दी हैं। फिलहाल ये पिछले लंबे समय से अपनी सेवाएं 'All in Hindi' को दे रहे हैं।

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