Prakash ka pravartan kya hai | प्रकाश का परावर्तन के उदाहरण

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प्रकाश का परावर्तन के प्रकार?

Prakash ka pravartan kya hai; विज्ञान हमेशा से कुछ छात्रों के लिए एक कठिन विषय की तरह रहता है। लाख कोशिशों के बाद भी वो इसके कई विषय समझ नहीं पाते हैं। इसी में से एक Topic है प्रकाश का परावर्तन। जिसे समझने के लिए ज्‍यादातर छात्र परेशान रहते हैं।

यदि आपको भी विज्ञान में प्रकाश का परावर्तन Topic बेहद कठिन लगता है, तो हमारे इस लेख को अंत तक पढि़ए। अपने इस लेख में हम आपको बताएंगे कि प्रकाश का परावर्तन क्‍या होता है। ये किस तरह से होता है। इसके कौन से उदाहरण हो सकते हैं। जिसे हम अपने जीवन में देखते हैं।

प्रकाश का परावर्तन क्‍या होता है?

यदि हम बात करें कि Prakash ka pravartan kya hai तो यह एक तरह से प्रकाश के मार्ग में होने वाले किसी तरह के बदलाव को कहा जाता है। जिसके कारण प्रकाश को हमारी आंखे देखने और समझने में धोखा खा जाती है। प्रकाश का परावर्तन केवल एक तरह से नहीं होता है। इसके भी कई प्रकार होते हैं।

आगे हम एक एक करके प्रकाश के अंदर होने वाले सभी परावर्तन के बारे में आपको जानकारी देंगे। जिससे आप समझ सकेंगे कि प्रकाश का परावर्तन क्‍या होता है और वो किस तरह से होता है।

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प्रकाश के परावर्तन के प्रकार

प्रकाश के परावर्तन के दो प्रकार होते हैं। जिसमें सबसे पहला होता है नियमित परावर्तन और दूसरा होता है अनियमित परावर्तन। आइए इन दोनों प्रकार को विस्‍तार से समझते हैं।

नियमित परावर्तन

य‍ह परावर्तन का पहला प्रकार होता है। इसके अंदर प्रकाश की कोई किरण किसी विशेष चीज से टकराकर वापिस एक सीध में चली जाती है, तो उसे नियमित परावर्तन कहते हैं। इसके अंदर हर बार किरण एक निश्चित दिशा में ही जाती है।

अनियमित परावर्तन

इस तरह के परावर्तन के अंदर भी प्रकाश की किरणें विपरीत दिशा में चली जाती है। लेकिन कई बार वो अलग अलग दिशाओं में चली जाती हैं। जबकि कई बार वो एक सीध में चली जाती हैं। उनके इसी अलग अलग दिशा में जाने को हम लोग अनियमित परावर्तन कहते हैं।

प्रकाश का परावर्तन

प्रकाश का परावर्तन

आइए सबसे पहले हम आपको Prakash ka pravartan kya hai इस बारे में जानकारी देते हैं। प्रकाश का परावर्तन उसे कहा जाता है जिसके अंदर प्रकाश की पूरी किरण अपने मार्ग में आने वाली चीज से टकराकर वापिस चली जाती है।

इसके अंदर संभव है कि वो किरण उस वस्‍तु से टकराकर किसी खास दिशा में चली जाए या उसके सीध में ही निकल जाए। यदि इस तरह की घटना जब होती है। तो उसे हम प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

उदाहरण

यदि हम प्रकाश के परावर्तन के उदाहरण की बात करें तो इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण हमारे घरों में लगा आइना होता है। जिसके सामने हम बैठकर अपना चेहरा देखते हैं।

सोचिए यदि हम आइने को लेकर रोशनी में जाते हैं तो हमारा चेहरा उसके अंदर एकदम साफ दिखाई देता है। जबकि यदि हम उसे अंधेरे में लेकर चले जाते हैं तो हमारा चेहरा उसके अंदर दिखाई देना बंद हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है। क्‍योंकि उसके ऊपर जो भी प्रकाश की किरण पड़ती है वो उसे लौटा देता है।

जबकि दूसरे उदाहरण के तौर पर हम जब अपने घरों के कमरों में सूरज की रोशनी को ले सकते हैं। सूरज की सीधी किरण बाहर पड़ती है। पर उसकी किरण का परावर्तन होकर होकर ही हमारे कमरों में भी रोशनी आ जाती है। जिसकी वजह से हमें दिन में कमरे की लाइट नहीं जलानी पड़ती है।

प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन

इसके बाद प्रकाश के परावर्तन का दूसरा प्रकार होता है प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन। यह तब होता है। जब किसी वस्‍तु पर प्रकाश की किरण पड़े और उसकी वजह से वो चीज चमकने  लगे। जो कि उस पर पड़ने वाले प्रकाश की वजह से हो रही है। इस स्‍थिति में प्रकाश का पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहलाएगा। इसे हम अपने आम जीवन में बेहद ही कम देखते हैं।

उदाहरण

इसके अंदर सबसे उपयुक्‍त उदाहरण हीरा होता है। जिस पर जब भी कभी प्रकाश की‍ किरण पड़ती है। तो हीरा पूरी तरह से चमकने लगता है। ऐसा प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण ही हम लोग जब कई बार सड़क पर जाते हैं तो लगता है कि आगे सड़क पर पानी भरा है, पर वहां जाने पर ऐसा होता नहीं है। क्‍योंकि य‍ह प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण होता है।

रेगिस्‍तान में रेत के अंदर तो ऐसा कई बार होता दिखाई देता है। जिससे आम लोग भ्रमित हो जाते हैं।

प्रकाश का अपवर्तन

आइए अब हम आपको Prakash ka pravartan kya hai में आगे जानकारी देते हैं कि प्रकाश का अपवर्तन का नियम क्‍या होता है। इसके अंदर भी एक किरण एक सीधे मार्ग में जाती हुई किसी दूसरे माध्‍यम में प्रवेश कर जाती है। जिसके बाद उस किरण के अंदर जो भी परिवर्तन देखने को मिलता है। उसे ही हम प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

उदाहरण

यदि हम प्रकाश के अपतर्वन के उदाहरण की बात करें तो इसके अंदर हम देखते हैं कि जब किसी पानी से भरे गिलास में लोहे की कोई कील डाल देते हैं। तो हमें अंदर से थोड़ी सी मुड़ी हुई दिखाई देती है। जिसे हम अपवर्तन के कारण देख सकते हैं। जबकि यदि हम उस कील को पानी से निकाल लें तो वो बिल्‍कुल सीधी मिलगी।

इसी तरह से यदि हम पानी के अंदर मछली को देखें तो वो भी अपनी वास्‍तविक जगह से थोड़ी अलग जगह दिखाई देती है। इसलिए यदि हम ऊपर से निशाना लगा कर मछली को पत्‍थर मारे तो वह उसे कभी नहीं लगेगा। क्‍यों‍कि हमें जिस जगह पर मछली दिखाई दे रही थी, वास्‍तव में मछली उससे थोड़ी सी अलग जगह पर थी।

प्रकाश का प्रकीर्णन

प्रकाश के अपवर्तन में एक प्रकाश का प्रकीर्णन भी होता है। इसके अंदर प्रकाश बीच में आने वाले धूल कणों की वजह से अपना रंग और मार्ग बदल लेता है। जिससे वह अपने मूल स्‍वरूप में ना रहकर दूसरा स्‍वरूप धारण कर लेता है।

उदाहरण

इसका सबसे अच्‍छा उदाहरण है आकाश। क्‍योंकि आकाश जो कि हमें धरती से नीले रंग का दिखाई देता है वो वास्‍तव में नीले रंग का नहीं है। लेकिन हमारे और उसके बीच की जो दूरी है उसकी वजह से उसका रंग प्रकीर्णन की वजह से बदला हुआ प्रतीत होता है।

प्रकीर्णन से बचने के लिए ही चौक चौराहों पर लाल बत्‍ती का प्रयोग किया जाता है। क्‍यों‍कि लाल रंंग एक ऐसा रंग होता है। जिसका प्रकीर्णन सबसे कम होता है। जिसे चाहे कितनी भी दूर से देेखा जाए तो उसी रंग में दिखाई देगा।

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Conclusion

आशा है कि आप हमारे इस लेख Prakash ka pravartan kya hai को पढ़ने के बाद समझ चुके होंगे कि प्रकाश का परावर्तन क्‍या होता है। साथ ही ये किस तरह से होता है। यदि आपको हमारा ये लेख पसंद आया है, तो हमारे इस लेख को अपने दोस्‍तों तक भी अवश्‍य शेयर करें। साथ ही इससे जुड़ा आपका कोई सवाल या सुझाव है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करें।

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उम्र में युवा और तजुर्बे में वरिष्ठ रोहित यादव हरियाणा के रहने वाले हैं। पत्रकारिता में डिग्री रखने के साथ इन्होंने अपनी सेवाएं कई मीडिया संस्थानों को दी हैं। फिलहाल ये पिछले लंबे समय से अपनी सेवाएं 'All in Hindi' को दे रहे हैं।

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